संज्ञा उपाध्‍याय की बाल कविताएँ

अवधि : 
00 hours 02 mins

संज्ञा उपाध्‍याय की तीन बाल कविताएँ इस वीडियो में हैं। ये प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हैं। इनमें से एक कविता कुछ इस तरह है :

मकड़ी जाला बुनती है
नहीं किसी की सुनती है

पूरे घर को देखभाल कर
कोने-अँतरे चुनती है

दम साधे जाले में बैठी
गुर शिकार के गुनती है

जाले पर झाड़ू फिरने पर
रोती है सिर धुनती है

किसे सुनाये दुखड़ा जाकर
दुनिया ऊँचा सुनती है।

17385 registered users
6659 resources