बूढ़ी काकी

अवधि : 
00 hours 27 mins

हर बरस 31 जुलाई को कथा सम्राट प्रेमचन्‍द का जन्‍मदिन होता है। प्रेमचन्‍द ऐसे कथाकार रहे हैं, जिनकी कहानियॉं प्राथमिक कक्षाओं से लेकर महाविद्यालय तक विभिन्‍न कक्षाआें में पढ़ाई जाती हैं। ईदगाह,पंच परमेश्‍वर,कफन,पूस की रात, नमक का दरोगा, बड़े भाई साहब आदि ऐसी ही कहानियाँ हैं।

'बूढ़ी काकी' भी उनकी ऐसी ही एक कहानी है। काकी जिसने अपनी सारी जायजाद अपने देवर के बेटे के नाम कर दी है। लेकिन वे अब उसका ध्‍यान नहीं रखते हैं। ठीक से खाने को भी नहीं देते। ऐसे में घर की एक बच्‍ची काकी का ध्‍यान रखती है।  

जाने-माने फिल्‍मकार गुलज़ार ने दूरदर्शन के लिए प्रेमचंद की कई कहानियाें पर छोटी-छोटी फिल्‍में बनाई थीं। 'बूढ़ी काकी' भी उनकी ऐसी ही फिल्‍म है। जिन कक्षाओं में यह कहानी पढ़ाई जाती है, उनके विद्यार्थी इसे देखकर कहानी के मर्म को और गहरे तक ग्रहण कर सकेंगे।

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