टुईयाँ- गुईयाँ

अवधि : 
00 hours 04 mins

ऐसे बच्‍चों के साथ काम करना आसान नहीं होता है, जिनसे आप पहली बार मिल रहे हों। खासकर कार्यशालाओं में।  कुछ भी काम शुरू करने से पहले बच्‍चों के संकोच और झिझक को तोड़ा जाना जरूरी होता है, ताकि वे न केवल एक-दूसरे से वरन् कार्यशाला संचालित कर रहे स्रोत व्‍यक्तियों से भी सहज हो जाएँ। ऐसी कार्यशालाओं को आयोजित करने वाले और उन्‍हें संचालित करने वाले नवाचारी कार्यकर्त्‍ता नए-नए तरीके विकसित करते ही रहते हैं।जानी-मानी शैक्षिक संस्‍था एकलव्‍य में कई सालों तक कार्यरत रहे कार्यकर्त्‍ता कार्तिक शर्मा इनमें से एक हैं। इन दिनों वे स्‍वंतत्र रूप से कार्य कर रहे हैं।

मध्‍यप्रदेश के सुदूर आदिवासी क्षेत्र के एक कस्‍बे तामिया में बच्‍चों की एक कार्यशाला का आरम्‍भ उन्‍होंने कैसे किया, आप इस वीडियो में देख सकते हैं। वे एक गीत गा रहे हैं। सुनने पर उसके शब्‍दों का कोई अर्थ शायद आपको समझ नहीं आएगा। पर गीत की ताकत यह है कि वह बच्‍चों के संकोच को उखाड़ फैंकता है। आप भी इसे आजमा सकते हैं।

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