शिक्षक विकास

अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन, देहरादून द्वारा प्रकाशित पत्रिका 'प्रवाह' का दिसम्‍बर 2017 - फरवरी 2018 का अंक लोक साहित्‍य विशेषांक के रूप में आया है। लोक साहित्‍य से परिचय और उसका शिक्षा में कैसे उपयोग हो सकता है, इस संदर्भ में इसमें उपयोगी सामग्री है। अंक की पीडीएफ आप डाउनलोड कर सकते हैं।

पर्यावरण अध्ययन हो या फिर विज्ञान, प्रश्न या सवाल से ही शुरू होता है और सवाल पर ही खत्‍म। तो फिर यदि इन विषयों से बच्‍चे में कौशलात्मक विकास का हो तो जाहिर है कि प्रथम कुछ कौशलों में सवाल रहेगा ही।

हमारा देश विविधताओं वाला एक ऐसा देश है जहाँ व्यक्ति के सामाजिक जीवन से लेकर उसके अकादमिक जीवन तक में पर्याप्त विविधता देखी जा सकती है। बहरहाल, मैं यहाँ बात करने जा रहा हूँ आजकल देश भर में चल रहे परीक्षा परिणाम के मौसम की जिसमें मानसून की बारिश की तरह विभिन्न राज्यों व केन्द्रीय बोर्डों की परीक्षा में टॉप कर रहे बच्चों के बारे में दनादन और सनसनाती हुई खबरें आ रही हैं और हर शहर में जश्न हो रहा है और हम भी मदहोश हो चले हैं। इन परीक्षाओं में जिन बच्चों ने भी जिस किसी परीक्षा में टॉप किया है, और शत-प्रतिशत अंक लाकर प्रतिशत की वास्तविक पर

रमाकान्त अग्निहोत्री  

भाषा सीखने की प्रक्रिया में बच्चे क्या कर लेते हैं, यह तो हैरान करने वाली बात है ही। लेकिन इससे भी अधिक हैरानी यह देखकर होती है कि वे वह सब क्यों नहीं करते जो उन्हें वास्तव में स्वाभाविक रूप से करना चाहिए।

रामचन्‍द्र स्‍वामी

गुणात्मक शिक्षा का अर्थ है विद्यार्थी का चहुँमुखी विकास। कौशल विकास का अर्थ है शिक्षक द्वारा विद्यालय में ऐसा वातावरण तैयार करना, जिसमें बच्चे अपने अनुभवों के आधार पर शिक्षक के सहयोग से ज्ञान का सृजन कर सकें।

शिक्षक अपने अध्यापन कौशल के माध्यम से बालकों के सीखने की क्षमता में अपेक्षित संवर्द्धन कर कक्षा-कक्ष में आनन्ददायी शैक्षिक वातावरण तैयार कर सकता है।

अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ‘पाठशाला – भीतर-बाहर’  नाम से शिक्षा पर केन्द्रित एक हिन्‍दी पत्रिका का प्रकाशन आरम्‍भ करने जा रहा है। इसका मुख्य मकसद है हिन्दी भाषा में शैक्षिक विमर्श समृद्ध हो। यह पत्रिका का लक्ष्‍य है कि वह जमीनी स्तर पर शिक्षा में काम करने वाले विभिन्न लोगों के अपने अनुभवों और उनके प्रश्नों के लिए संवाद और विवेचना का मंच बने। पत्रिका का पहला अंक जुलाई, 2018 में आने की सम्‍भावना है।

एस. आनंदलक्ष्मी

पूनम मेध

चेन्नई के एक स्कूल ने अपने बच्चों को छुट्टियों का जो एसाइनमेंट दिया वो पूरी दुनिया में वायरल हो रहा है। वजह बस इतनी कि उसे बेहद सोच समझकर बनाया गया है। इसे पढ़कर अहसास होता है कि हमारा समाज वास्‍तव में कहाँ जा रहा है। सारी जिम्‍मेदारी लगता है स्‍कूल पर ही छोड़ दी है।  

अन्नाई वायलेट मैट्रीकुलेशन एण्‍ड हायर सेकेंडरी स्कूल ने बच्चों के लिए नहीं, बल्कि अभिभावकों  के लिए होमवर्क दिया है, जिसे हर अभिभावक को पढ़ना चाहिए।

मनीष : आज के समय में आधुनिक शिक्षा गाँव को किस प्रकार प्रभावित कर रही है?

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