शिक्षक विकास

सुशील जोशी

पिछले भाग में हमने बात को इस सवाल पर छोड़ा था कि लैमार्क के अर्जित गुणों के हस्तान्तरण और डार्विन की विविधता में से चयन की परिकल्पनाओं के बीच फैसला जैव-विकास की अवधारणा को आगे ले जाने के लिए निर्णायक महत्व का सवाल था। हमने यह भी देखा था कि इस  दुविधा  का  समाधान  सिर्फ अवलोकनों के आधार पर नहीं हो सकता। अब आगे बढ़ते हैं।

भिन्‍न के कई अर्थो में से एक अर्थ है – “एक पूर्ण के हिस्‍से के रूप में” । इस वीडियो में हमने यह प्रयास किया है कि इस तरीके से भिन्‍न शिक्षण कराने में क्‍या फायदे हैं, और इस तरीके से बच्‍चों में क्‍या सम्‍भावित दिक्‍कतें हो सकती हैं, इस तरीके की क्‍या सीमाएँ हैं। यह वीडियो हमारी मदद करता है कि इस तरीके के साथ काम करने के दौरान हम इन दिक्‍कतों पर ध्‍यान दे सकें जिससे बच्‍चों की और बेहतर समझ बन सके।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ,भारत शासन द्वारा विभिन्‍न संस्‍थाओं के साथ मिलकर सेवापूर्व आरम्भिक अध्‍यापक शिक्षा विषयक मुद्दों पर एक अन्‍तरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का आयोजन 2 से 4 फरवरी, 2010 तक नई दिल्‍ली में किया गया था। उसकी विस्‍तृत कार्यवाही की रपट यहाँ उपलब्‍ध है।

प्रारम्भिक शिक्षकों के सेवाकालीन विकास के मुद्दों पर अन्‍तरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का आयोजन अक्‍टूबर 2010 में भुवनेश्‍वर, उड़ीसा में किया गया था। सम्‍मेलन की विस्‍तृत कार्यवाही का लेखा-जोखा इस रपट में दिया गया है।

विद्या भवन सोसायटी, उदयपुर, राजस्‍थान में 23 से 25 फरवरी, 2009 तक शिक्षक विकास एवं प्रबन्‍धन पर एक अन्‍तरराष्‍ट्रीय सेमीनार का आयोजन किया गया था। इस सेमीनार नीति व कामकाज सम्‍बन्‍ध्‍ाी चचाएँ  हुईं, सुझाव आए। सेमीनार की विस्‍तृत रिपोर्ट यहाँ प्रस्‍तुत है।

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