शिक्षक विकास

‘शैक्षिक प्रवाह’ अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन द्वारा प्रकाशित होने वाली पत्रिका है जिसका प्रकाशन शिक्षक साथियों और शिक्षा के सरोकारों से जुड़े लोगों को, उनके विचारों और कार्यों को एक सूत्र में बाँधने के उद्देश्य से किया जाता है।  पत्रिका  निशुल्क वितरण हेतु प्रकाशित होती है।  आप सभी के साथ इस पत्रिका के रजत जयन्‍ती अंक को साझा करते हुए हमें बेहद हर्ष है। इस पत्रिका ने नन्हे-नन्हे क़दमों से चलते हुए कई मोड़ों से मुड़ते हुए आज 25 वें पायदान पर कदम रखा है। इस पत्रिका की विशेषता है इसका पूरी तरह से फील्ड के अनुभवों को संजोना। शिक्षक साथियों के अनुभव, चुनौतियाँ, किस्से, प्रक

कोरोना महामारी काल अत्यधिक लम्बा और अनिश्चितकालीन होता जा रहा था। लोग सामान्य स्थिति को देखने के लिए तरसने लगे हैं। हालाँकि काम कुछ समय तक प्रभावित तो रहे मगर हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहना प्रगतिशील मानव को अनुकूल कब तक लग सकता है?

काजल अडवाणी

जब लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या आज से दस बरस पहले मैं यह जानती थी कि मेरा बेटा पंकज अडवाणी  स्नूकर और बिलियर्ड्स का विश्व चैम्पियन बनेगा, तो मैं कहती हूँ, ‘‘नहीं, जानती तो मैं नहीं थी, लेकिन मुझे विश्वास था कि वह बन सकता है।’’

पाठशाला - भीतर और बाहर

अंक 5 अगस्त 2020 में

परिप्रेक्ष्य

बच्चों के सवाल हल्के मत लीजिए * कालू राम शर्मा

शिक्षकों का अनुभव लेखन : शिक्षक–शिक्षा में जगह और सम्भावनाएँ * अमित कोहली

स्वाती सरकार

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' में प्रकाशित इस लेख में विजय प्रकाश जैन अपने भाषा शिक्षण के अपने अध्‍यापकीय अनुभवों को साझा करते हैं।

पूरा लेख पढ़ने के लिए नीचे दी गई लिंक से पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं।

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' अंक 1, जुलाई 2018  में प्रकाशित यह लेख कहता है कि स्‍कूल में आकर विद्यार्थी पढ़ना-लिखना सीखते हैं। यह प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए कि उन्‍हें पढ़ने का चस्‍का लग सके और वे एक सक्षम पाठक बन सकें। यह जरूरी है कि विद्यार्थी जब स्‍कूल निकलें तब समक्ष और स्‍वतंत्र पाठक बनकर निकलें। सीखने में आत्‍मनिर्भरता हासिल करने और सीखने की जीवनपर्यन्‍त प्रक्रिया में शामिल होने यह एक महत्‍तपूर्ण पूर्व शर्त है। लेकिन क्‍या स्‍कूल बच्‍चे को सक्षम पाठक बना पा रहे हैं?

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला- भीतर और बाहर' अंक 1 जुलाई,2018 में प्रकाशित सुन्‍दर नौटियाल का यह कक्षा अनुभव यह बताता है कि शिक्षक का एक काम यह भी है कि वह बच्‍चों की खोजी प्रवृत्ति और रचनात्‍मकता को प्रोत्‍साहित करे।

लेख नीचे दी लिंक से डाउनलोड किया जा सकता है।

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' अंक 1, जुलाई,2018 में यह एक रोचक संवाद प्रकाशित हुआ है। इस संवाद में दिल्‍ली सरकार द्वारा संचालित प्राथमिक स्‍कूल के दो शिक्षकों, माध्‍यमिक स्‍तर के एक शिक्षक, डाइट की एक प्राध्‍यापिका और दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के शिक्षा संकाय द्वारा संचालित प्रायोगिक स्‍कूल की शिक्षिका ने भागीदारी की है।

इस संवाद को पढ़ने के लिए नीचे दी गई लिंक से पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं।

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर '  अंक 1 जुलाई,2018 में प्रकाशित यह  लेख एक अच्‍छी विषय आधारित कक्षा के बारे में हमारी धारणाओं पर प्रश्‍न उठाता है। हम एक 'अच्‍छी कक्षा'  किस प्रकार समझते हैं ?  वे कौन से पहलू हैं जो एक 'अच्‍छी कक्षा' को एक 'सफल विषयी कक्षा' भी बनाते हैं?  दूसरे शब्‍दों में हम इस प्रश्‍न को उठाकर यह सन्‍देश देने का इरादा रखते हैं कि सामान्‍यत: एक अच्‍छी कहलाई जाने वाली कक्षा में विषय आधारित भागीदारी भी हो, ऐसा जरूरी नहीं । इस लेख में उपयुक्‍त की श्रेणी में रखी जाने वाली उन गणितीय कक्षाओं के बारे में चर्चा की है जो गणितीय सोच के विकास में नगण्‍य भूमिका निभाती हैं।

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