शिक्षक विकास

पाठशाला भीतर और बाहर अंक 6, दिसम्बर 2020  : अनुक्रम

शिक्षणशास्‍त्र

डॉ. गिफ्टी जोएल

अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी लर्निंग कर्व

हिन्दी अंक 22 सितम्बर,2020

विकलांग बच्‍चों के शिक्षण का परिप्रेक्ष्‍य

‘शैक्षिक प्रवाह’ अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन द्वारा प्रकाशित होने वाली पत्रिका है जिसका प्रकाशन शिक्षक साथियों और शिक्षा के सरोकारों से जुड़े लोगों को, उनके विचारों और कार्यों को एक सूत्र में बाँधने के उद्देश्य से किया जाता है।  पत्रिका  निशुल्क वितरण हेतु प्रकाशित होती है।  आप सभी के साथ इस पत्रिका के रजत जयन्‍ती अंक को साझा करते हुए हमें बेहद हर्ष है। इस पत्रिका ने नन्हे-नन्हे क़दमों से चलते हुए कई मोड़ों से मुड़ते हुए आज 25 वें पायदान पर कदम रखा है। इस पत्रिका की विशेषता है इसका पूरी तरह से फील्ड के अनुभवों को संजोना। शिक्षक साथियों के अनुभव, चुनौतियाँ, किस्से, प्रक

कोरोना महामारी काल अत्यधिक लम्बा और अनिश्चितकालीन होता जा रहा था। लोग सामान्य स्थिति को देखने के लिए तरसने लगे हैं। हालाँकि काम कुछ समय तक प्रभावित तो रहे मगर हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहना प्रगतिशील मानव को अनुकूल कब तक लग सकता है?

काजल अडवाणी

जब लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या आज से दस बरस पहले मैं यह जानती थी कि मेरा बेटा पंकज अडवाणी  स्नूकर और बिलियर्ड्स का विश्व चैम्पियन बनेगा, तो मैं कहती हूँ, ‘‘नहीं, जानती तो मैं नहीं थी, लेकिन मुझे विश्वास था कि वह बन सकता है।’’

पाठशाला - भीतर और बाहर

अंक 5 अगस्त 2020 में

परिप्रेक्ष्य

बच्चों के सवाल हल्के मत लीजिए * कालू राम शर्मा

शिक्षकों का अनुभव लेखन : शिक्षक–शिक्षा में जगह और सम्भावनाएँ * अमित कोहली

स्वाती सरकार

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' में प्रकाशित इस लेख में विजय प्रकाश जैन अपने भाषा शिक्षण के अपने अध्‍यापकीय अनुभवों को साझा करते हैं।

पूरा लेख पढ़ने के लिए नीचे दी गई लिंक से पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं।

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' अंक 1, जुलाई 2018  में प्रकाशित यह लेख कहता है कि स्‍कूल में आकर विद्यार्थी पढ़ना-लिखना सीखते हैं। यह प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए कि उन्‍हें पढ़ने का चस्‍का लग सके और वे एक सक्षम पाठक बन सकें। यह जरूरी है कि विद्यार्थी जब स्‍कूल निकलें तब समक्ष और स्‍वतंत्र पाठक बनकर निकलें। सीखने में आत्‍मनिर्भरता हासिल करने और सीखने की जीवनपर्यन्‍त प्रक्रिया में शामिल होने यह एक महत्‍तपूर्ण पूर्व शर्त है। लेकिन क्‍या स्‍कूल बच्‍चे को सक्षम पाठक बना पा रहे हैं?

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