शिक्षक विकास

स्वाती सरकार

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' में प्रकाशित इस लेख में विजय प्रकाश जैन अपने भाषा शिक्षण के अपने अध्‍यापकीय अनुभवों को साझा करते हैं।

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शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' अंक 1, जुलाई 2018  में प्रकाशित यह लेख कहता है कि स्‍कूल में आकर विद्यार्थी पढ़ना-लिखना सीखते हैं। यह प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए कि उन्‍हें पढ़ने का चस्‍का लग सके और वे एक सक्षम पाठक बन सकें। यह जरूरी है कि विद्यार्थी जब स्‍कूल निकलें तब समक्ष और स्‍वतंत्र पाठक बनकर निकलें। सीखने में आत्‍मनिर्भरता हासिल करने और सीखने की जीवनपर्यन्‍त प्रक्रिया में शामिल होने यह एक महत्‍तपूर्ण पूर्व शर्त है। लेकिन क्‍या स्‍कूल बच्‍चे को सक्षम पाठक बना पा रहे हैं?

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला- भीतर और बाहर' अंक 1 जुलाई,2018 में प्रकाशित सुन्‍दर नौटियाल का यह कक्षा अनुभव यह बताता है कि शिक्षक का एक काम यह भी है कि वह बच्‍चों की खोजी प्रवृत्ति और रचनात्‍मकता को प्रोत्‍साहित करे।

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शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' अंक 1, जुलाई,2018 में यह एक रोचक संवाद प्रकाशित हुआ है। इस संवाद में दिल्‍ली सरकार द्वारा संचालित प्राथमिक स्‍कूल के दो शिक्षकों, माध्‍यमिक स्‍तर के एक शिक्षक, डाइट की एक प्राध्‍यापिका और दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के शिक्षा संकाय द्वारा संचालित प्रायोगिक स्‍कूल की शिक्षिका ने भागीदारी की है।

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शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर '  अंक 1 जुलाई,2018 में प्रकाशित यह  लेख एक अच्‍छी विषय आधारित कक्षा के बारे में हमारी धारणाओं पर प्रश्‍न उठाता है। हम एक 'अच्‍छी कक्षा'  किस प्रकार समझते हैं ?  वे कौन से पहलू हैं जो एक 'अच्‍छी कक्षा' को एक 'सफल विषयी कक्षा' भी बनाते हैं?  दूसरे शब्‍दों में हम इस प्रश्‍न को उठाकर यह सन्‍देश देने का इरादा रखते हैं कि सामान्‍यत: एक अच्‍छी कहलाई जाने वाली कक्षा में विषय आधारित भागीदारी भी हो, ऐसा जरूरी नहीं । इस लेख में उपयुक्‍त की श्रेणी में रखी जाने वाली उन गणितीय कक्षाओं के बारे में चर्चा की है जो गणितीय सोच के विकास में नगण्‍य भूमिका निभाती हैं।

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' अंक 1 जुलाई, 2018 में प्रकाशित देवयानी भारद्वाज का यह लेख भाषा शिक्षण में कविता की जगह, उसे समझने के नजरिए, कविता को उपयोग में लाए जाने के तौर तरीकों के संदर्भ में स्‍कूली शिक्षक को मदद मिल सके इस दिशा में एक प्रयास है।
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शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' अंक 1 जुलाई, 2018 में प्रकाशित यह लेख वर्तमान परिप्रेक्ष्‍य में गुणवत्‍ता के विभिन्‍न आयामों की बात करता है। गुणवत्‍ता के मायने क्‍या हैं ?  क्‍या हर क्षेत्र के लिए गुणवत्‍ता के मानदण्‍ड और उसके एक ही होने चाहिए या क्षेत्र विशेष के हिसाब से इससे फर्क हो सकते हैं ? इन प्रश्‍नों पर विचार नहीं किया जाता। यह लेख शिक्षा और सामाजिक सेवाओं के क्षेत्र में गुणवत्‍ता तय करने के लिएएद्योग जगत के मानदण्‍ड अपनाने के सन्‍दर्भ में विश्‍लेषण प्रस्‍तुत करता है।
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शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' अंक 1 जुलाई, 2018 में प्रकाशित भारती पंडित का यह लेख शुरुआती कक्षाओं में भाषा की पढ़ाई में शुद्धता के विषय पर विमर्श करता है। यह शिक्षकों की चिन्‍ता का प्रमुख विषय रहता है। इस चिन्‍ता के चलते बच्‍चों के उच्‍चारण दोष और इसे सुधारने या शुद्ध उच्‍चारण के लिए नाना प्रकार के प्रयास किए जाते हैं। आज ये प्रयास भाषा पढ़ाई के मकसद में बड़ी बाधा के तौर पर देखे जाते हैं। यह आलेख भाषा शिक्षण में उच्‍चारण के विविध निहितार्थों पर विचार प्रस्‍तुत करता है और सवाल उठाता है कि क्‍या उच्‍चारण को एक बहुत बड़ी समस्‍या के रूप में देखा जाना चा

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' अंक 1 जुलाई, 2018 में प्रकाशित  महमूद खान का यह लेख कक्षा में संवाद की महत्‍ताके बारे में है। अपनी पर्यावरण की कक्षा का अनुभव साझा करते हुए वे बताते हैं कक्षा में संवाद बच्चों को सीखने में किस तरह मददगार होता है। लेखक सुकरात को उद्धृत करते हुए संक्षेप में यह बताता है कि संवाद क्‍या है, इसकी प्रक्रिया कैसी हो, प्रन कैसे हों, किन पर विमर्श हो, किन पर नहीं, शिक्षक की क्‍या तैयारी हो, शिक्षक की क्‍या भूमिका हो और बच्चों की इसमें क्‍या जगह हो।

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