कक्षा 9-12

यह बात अच्छी हो या बुरी, मानव समाजों में स्कूली व्यवस्थाएँ अब स्थापित हो चुकी हैं। घर में ही स्कूलिंग को छोड़ दें तो स्कूल चाहे मुख्य धारा का हो या वैकल्पिक, बच्चे घर और माता-पिता से दूर वयस्कों के एक और समूह के पास जाते हैं, जिन्हें शिक्षक कहते हैं और यहाँ वे एक ऐसी गतिविधि के लिए जाते हैं जिसे हम शिक्षा कहते हैं। स्कूलों में शिक्षा कमोबेश स्पष्ट लक्ष्यों के साथ की जाने वाली गतिविधि है। स्कूलों ने ज्ञानार्जन के इस प्रोजेक्ट के एक बड़े हिस्से को (व्यावसायिक तथा आर्थिक मायनों में) अपने व्यापार के तौर पर ले लिया है। स्कूल व्यक्तियों को भविष्य में किसी पेशे के लिए त

कोरोना वायरस का फैलता संक्रमण तरह-तरह की आंशकाओं को जन्म दे रहा है। इसे लेकर अवैज्ञानिक सूचनाएँ/अफवाहें भी फ़ैलाई जा रही हैं। ऐसे में बच्चों और बड़ों दोनों को कोरोना वायरस और इससे फैलने वाली बीमारी के बारे में सही-सही जानकारी उपलब्ध कराने की जरूरत है। इस जरूरत को देखते हुए

रमाकान्त अग्निहोत्री

भारत के संविधान की उद्देशिका को मालवी लोक शैली के भजन के रूप में इस वीडियो में प्रस्‍तुत किया गया है। रोचक है। कक्षा में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

रमाकान्त अग्निहोत्री

रमाकान्त अग्निहोत्री

Ncert तथा सभी बोर्ड में कक्षा 10 में बच्चों को दिष्ट धारा मोटर तथा दिष्ट धारा जनित्र पढाया जाता है|बच्चों को उनके चित्र बनाने में बेहद कठिनाई का अनुभव होता है|वे उनके चित्रों में अंतर नहीं कर पाते|प्रस्तुत वीडियो में एनीमेशन के द्वारा न सिर्फ दिष्ट धारा जनित्र को बनाना बताया गया है बल्कि दिष्ट धारा मोटर बनाते समय उसमे कितना बदलाव करना है,यह भी बताया गया है|

उत्तल लेंस द्वारा उसके सम्मुख रखी वस्तु और उनके प्रतिबिम्बों की सामान्यत: 6 स्थितियां होती है|इनमें
(1) वस्तु अनंत पर स्थित हो
(2) वस्तु अनंत और 2 F के बीच हो
(3) वस्तु 2 F पर हो
(4) वस्तु 2 F और F के बीच हो
(5) वस्तु F पर हो
(6) वस्तु F और P अर्थात ध्रुव के बीच हो
इन सभी 6 स्थितियों में उत्तल लेंस द्वारा 6 अलग-अलग प्रकार से प्रतिबिम्ब बनते है|इन्हें समझने में बच्चों को काफी मुश्किल आती है|

मुहम्मद तुग़लक चारित्रिक विरोधाभास में जीने वाला एक ऐसा बादशाह था जिसे इतिहासकारों ने उसकी सनकों के लिए खब़्ती करार दिया। जिसने अपनी सनक के कारण राजधानी बदली और ताँबे के सिक्के का मूल्य चाँदी के सिक्के के बराबर कर दिया। लेकिन अपने चारों ओर कट्टर मज़हबी दीवारों से घिरा तुग़लक कुछ और भी था। उसमे मज़हब से परे इंसान की तलाश थी। हिंदू और मुसलमान दोनों उसकी नजर में एक थे। तत्कालीन मानसिकता ने तुग़लक की इस मान्यता को अस्वीकार कर दिया और यही ‘अस्वीकार’ तुग़लक के सिर पर सनकों का भूत बनकर सवार हो गया था।

माध्यमिक से लेकर हायर सेकंडरी स्तर तक उत्तल दर्पण हम पढ़ते हैं जिनमें हम उनके उपयोग भी सीखते हैं। उत्तल दर्पण के उपयोग उनके प्रतिबिम्बों की प्रकृति से निर्धारित होते हैं।प्रस्तुत विडियो में उत्तल दर्पण( कॉन्वेक्स मिरर )के उपयोग को कांसेप्ट के साथ कम समय में बताने का प्रयास किया है। इसमें एनीमेशन और पिक्चर्स के द्वारा सरल भी बनाये जाने की कोशिश की गयी है।

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