पूर्व-प्राथमिक

यह बात अच्छी हो या बुरी, मानव समाजों में स्कूली व्यवस्थाएँ अब स्थापित हो चुकी हैं। घर में ही स्कूलिंग को छोड़ दें तो स्कूल चाहे मुख्य धारा का हो या वैकल्पिक, बच्चे घर और माता-पिता से दूर वयस्कों के एक और समूह के पास जाते हैं, जिन्हें शिक्षक कहते हैं और यहाँ वे एक ऐसी गतिविधि के लिए जाते हैं जिसे हम शिक्षा कहते हैं। स्कूलों में शिक्षा कमोबेश स्पष्ट लक्ष्यों के साथ की जाने वाली गतिविधि है। स्कूलों ने ज्ञानार्जन के इस प्रोजेक्ट के एक बड़े हिस्से को (व्यावसायिक तथा आर्थिक मायनों में) अपने व्यापार के तौर पर ले लिया है। स्कूल व्यक्तियों को भविष्य में किसी पेशे के लिए त

संज्ञा उपाध्‍याय की तीन बाल कविताएँ इस वीडियो में हैं। ये प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हैं। इनमें से एक कविता कुछ इस तरह है :

मकड़ी जाला बुनती है
नहीं किसी की सुनती है

पूरे घर को देखभाल कर
कोने-अँतरे चुनती है

दम साधे जाले में बैठी
गुर शिकार के गुनती है

क्या आपको गरमी के दिनों में टोपी पहनना अच्छा लगता है? इस प्यारी-सी कहानी में सुनें कि टोपी पहनना और किसको पसंद है।

यह कहानी एक बिल्ली के बारे में है जो उड़ना चाहती है।

यह एक नकलची बंदर की कहानी है जो बिना सोचे-समझे दूसरों की नकल करता है और बाद में फिर पछताता है। कहानी चिर-परिचित है। पर इस वीडियो में देखने लायक बात यह है कि बच्‍चों को यह कहानी किन हाव-भावों के साथ सुनाई जा सकती है। ताकि बच्‍चों की रुचि कहानी सुनने में हो।

पूर्व प्राथमिक शिक्षा या प्रारम्भिक बाल्‍यावस्‍था शिक्षा का वास्‍तविक अर्थ क्‍या है? क्‍या इस उम्र में बच्‍चे को पढ़ना-लिखना सिखाना उद्देश्‍य है ? बाल केन्द्रित शिक्षा का अर्थ क्‍या है? क्‍या कमरे में बच्‍चों को जमा करके बिठाना भर पूर्व प्राथमिक शिक्षा है? ऐसी शिक्षा के लिए क्‍या संसाधन चाहिए? कौन-सी गतिविधियाँ होनी चाहिए? शिक्षक कैसे हों? ऐसे कई सारे सवालों का व्‍यवहारिक जवाब देता है यह वीडियो।

इसे एन.सी.ई.आर.टी. के सी.आई.ई.टी. ने बनाया है।

प्राथमिक कक्षा में बच्‍चों को गिनने और गिनती के अभ्‍यास करवाने के लिए रोचक और सरल वर्कशीट । इन्‍हें देखकर आप भी और बना सकते हैं।

प्राथमिक कक्षा के बच्‍चों के लिए एक गतिविधि

प्राथमिक कक्षाओं के बच्‍चों के लिए एक रोचक एनीमेशन फिल्‍म। इसके माध्‍यम से बच्‍चों में पेड़ों और मिल-जुलकर रहने के महत्‍व को बताया जा सकता है।

 

इन्दिरा विजयसिम्‍हा

इस लेख का पहला भाग पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाऍं

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