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शिक्षा के समग्र उद्देश्य

By mshraddha900@gm... | अगस्त 25, 2016

शिक्षा के समग्र उद्देश्य :आईने को झरोखो मे बदलना

अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन, देहरादून की पत्रिका 'प्रवाह' का यह भाषा विशेषांक है। इसमें भाषा के विभिन्‍न आयामों पर 26 लेख हैं। इन लेखों में भाषा शिक्षकों की डायरी, पुस्‍तक चर्चा तथा कक्षा-कक्ष में की जाने वाली गतिविधियाँ तथा उनसे हासिल अनुभव शामिल हैं। 

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महान क‍थाकार प्रेमचंद की एक अमर कहानी है 'ईदगाह'। सालों से पाठ्यपुस्‍तकों में पढ़ाई जा रही है।

प्रसिद्ध फिल्‍म निर्देशक गुलज़ार जी ने उसे एक फिल्‍म का रूप दिया है। इसका उपयोग बच्‍चों के बीच किया जा सकता है।

जानी-मानी लेखिका महाश्‍वेता देवी की एक प्रसिद्ध कहानी है 'क्‍यूँ..क्‍यूँ..छोरी' । कहानी की नायिका हमेशा सवाल पूछती रहती है। नायिका स्‍कूल में पढ़ना चाहती है, पर उसके लिए उसे संघर्ष करना पड़ता है। अंतत: वह सफल भी होती है। यहाँ प्रस्‍तुत है इसका कहानी का आॅडियो। इसे आप अपनी कक्षा में बच्‍चों को सुना सकते हैं।

प्रभात

कला शिक्षा स्‍कूलों में क्‍यों जरूरी है, यह सवाल अक्‍सर उठता रहता है। राष्‍ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 में इस बात पर पर्याप्‍त प्रकाश डाला गया है। पाठ्यचर्या कहती है कि प्राथमिक कक्षाओं में कला की शिक्षा इसलिए जरूरी नहीं है कि किसी बच्‍चे को किसी कला विशेष में पारंगत बनाना है। बल्कि कला शिक्षा अन्‍य विषयों को समझने और उनके अवधारणात्‍मक विकास में मदद करती है। अगर विषयों की दीवार तोड़ दी जाए तो उन्‍हें समझना आसान हो जाता है। यह वीडियो इस धारणा को बहुत ही प्रभावी ढंग से समझाता है।

जयशंकर चौबे

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