भाषा

रंजना सिंह

मनोहर चमोली 'मनु'

अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन पौड़ी, उत्‍तराखण्‍ड के सभागार में 23 सितम्‍बर,2017 शनिवार की शाम ‘शिक्षण में कहानियों का सन्दर्भ’ पर चर्चा के नाम रही। प्रख्यात रंगकर्मी, संस्कृतिकर्मी, शिक्षा के अध्येता, बालमन के जानकार, छायाकार, फिल्म निर्माता और साहित्यकर्मी सुभाष रावत ने कहानियों के संदर्भ में बेहद कारगर और छुई-अनछुई बातों को रेखांकित किया।

बच्चों द्वारा लिखते समय की जाने वाली गलतियाँ अक्सर शिक्षकों के लिए भयानक चिन्‍ता का विषय होती हैं। ये गलतियाँ कई बार मात्राओं की होती हैं तो कई बार पूरा शब्द गलत लिखे जाने की।  

मनोज कुमार

बहुत समय पहले एक घमंडी जनरल अपने घोड़े से गिरे। तब उन्‍होंने पहली बार,अपने आसपास की जमीन में उगे जंगली फूलों की सुन्‍दरता को देखा। उस दिन उन्‍होंने प्रण किया कि वो इस दुनिया को शांति और सुन्‍दरता से भरेंगे।

आज से पचास साल पहले जब शीत-युद्ध अपनी चरम सीमा पर था तब एक दम्‍पत्ति  (जेनेट चार्टरस  और माइकल फोरमेन) ने बच्‍चों के लिए एक नई तरह की किताब लिखी। इस किताब में युद्ध की गलतियों और पर्यावरण के नाश को उजागर किया गया था।

रूसी कथाकार एवं चित्रकार वी सुतऐव ने बच्‍चों के लिए कुछ सुन्‍दर चित्र कथाएँ बनाई हैं। उनमें से ही एक है बिल्‍ली के तीन बच्‍चे। इसका हिन्‍दी अनुवाद कई बरस पहले एकलव्‍य ने प्रकाशित किया था। अब इसका एक वीडियो भी जारी हुआ है।

प्राथमिक कक्षाओं के बच्‍चों के लिए यह एक उपयोगी पुस्‍तक है।

अनिल सिंह  

अब यह एक प्रगतिशील विचार है कि मौखिक भाषा की मजबूती और विस्तार, लिखने और पढ़ने के कौशल पर प्रत्यक्ष एवं सकारात्मक असर डालते हैं।

हिन्दी

घर में अगर पशु हों, खासकर दूध देने वाले पशु, तो बच्‍चों में उनकी गतिविधियों के प्रति गहरी जिज्ञासा रहती है। वे उनके बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा जानना चाहते हैं।

जब घर में गाय कोई बच्‍चा देने वाली होती है, तो किस तरह की हलचल होती है, इसे एक बच्‍चे ने आँखों देखे हाल की तरह अपनी भाषा में लिखा था। यह एकलव्‍य की बाल विज्ञान पत्रिका 'चकमक' में प्रकाशित हुआ था। एकलव्‍य ने इसे एक सु्न्‍दर चित्रित किताब केे रूप में प्रकाशित किया है। साथ ही इस पर एक वीडियो भी जारी किया है। 

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