भाषा

दिसम्‍बर 2016 में देहरादून के प्रकाशन संस्‍थान ‘समय-साक्ष्‍य’ ने देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन किया था। इस आयोजन में एक सत्र बालसाहित्‍य पर भी था। टीचर्स ऑफ इंडिया के हिन्‍दी सम्‍पादक राजेश उत्‍साही ( जो लम्‍बे समय तक एकलव्‍य की बालविज्ञान पत्रिका 'चकमक' के सम्‍पादन से जुड़े रहे हैं) को इस सत्र के लिए बीज व्‍यक्‍तव्‍य देने की जिम्‍मेदारी दी गई थी। इस अवसर पर उन्‍होंने जो वक्‍तव्‍य दिया उसका पाठ नीचे दिया गया है।

कुछ गीत बहुत कमाल के होते हैं। और कुछ गीत कमाल करते हुए बन जाते हैं। हमारी लोककथाओं में ऐसे गीत बहुतायत में मिलते हैं। ऐसा ही एक गीत बुन्‍देलखण्‍डी बोली में है। इस गीत को सुन्‍दर चित्रों के साथ एकलव्‍य ने एक किताब के रूप में प्रस्‍तुत किया है।

इस गीत को भाषा की प्राथमिक कक्षाओं में उपयोग किया जा सकता है।

हिन्दी

विजय प्रकाश जैन

ब्रजेश वर्मा

पढ़ना  सीखने  की  प्रक्रिया में एक  निर्णायक और अत्यन्त महत्वपूर्ण मोड़ तब आता है जब बच्चे के सामने यह रहस्य खुल जाता है कि शब्द कुछ आवाजों, अक्षरों का मेल हैं जिन्हें क्रम से उच्चारित करना होता है। और इन आवाजों का क्रम बदलकर अनेक शब्द बनाए जा सकते हैं। गोलू ने मुस्कान के आवासीय शिविर में इतना भर सीखा था। इसके बाद का सीखना उसकी निजी रुचि और प्रयासों का नतीजा था।

ऐसे बच्‍चों के साथ काम करना आसान नहीं होता है, जिनसे आप पहली बार मिल रहे हों। खासकर कार्यशालाओं में।  कुछ भी काम शुरू करने से पहले बच्‍चों के संकोच और झिझक को तोड़ा जाना जरूरी होता है, ताकि वे न केवल एक-दूसरे से वरन् कार्यशाला संचालित कर रहे स्रोत व्‍यक्तियों से भी सहज हो जाएँ। ऐसी कार्यशालाओं को आयोजित करने वाले और उन्‍हें संचालित करने वाले नवाचारी कार्यकर्त्‍ता नए-नए तरीके विकसित करते ही रहते हैं।जानी-मानी शैक्षिक संस्‍था एकलव्‍य में कई सालों तक कार्यरत रहे कार्यकर्त्‍ता कार्तिक शर्मा इनमें से एक हैं। इन दिनों वे स्‍वंतत्र रूप से कार्य कर रहे हैं।

वर्तमान समय में ‘पढ़ना’ एक ऐसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो आमतौर पर निजी जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। हम अपने दैनिक जीवन के न जाने कितने ही कार्यों को आसानी से केवल और केवल इसलिए कर लेते हैं क्योंकि हम पाठ्य को पढ़कर आशय स्पष्ट कर सकते हैं और उसी के अनुरूप कार्यों को नियोजित भी कर लेते हैं।

सविता सोहित व शिवानी तनेजा


इस लेख के जरिए हम कक्षा में बच्चों की प्रथम भाषा को एक संसाधन के रूप में इस्तेमाल कर व्याकरण के नियमों को ढूँढ़ने के अनुभवों को साझा कर रहे हैं। सविता ने कक्षा में बच्चों की सक्रिय भागीदारी को यहाँ विस्तार से प्रदर्शित किया है। अन्त में शिवानी ने कक्षा की प्रक्रियाओं का संक्षिप्त विश्लेषण किया है।

प्राथमिक कक्षाओं में भाषा शिक्षण में छोटी और सरस कविताओं का बहुत महत्‍व होता है। आमतौर पर शिक्षक जो कविताएँ पाठ्यपुस्‍तक में हैं, उन पर ही निर्भर रहते हैं। जरूरी है कि बच्‍चों को कुछ अन्‍य कविताओं से भी परिचित करवाया जाए।

ऐसी ही कविताओं के कुछ संकलन एकलव्‍य ने प्रकाशित किए हैं। ऐसा ही एक संग्रह है 'नई सवारी'। इसमें 14 कविताएँ हैं। ये कविताऍं चर्चित बालविज्ञान पत्रिका 'चकमक' से संग्रहित की गई हैं। आप भी इन कविताओं का उपयोग करके देखें।

इस वीडियो का मुख्‍य उद्देश्‍य उच्‍च प्राथमिक कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाए जा रहे विभिन्‍न विषयों में उनकी प्रगति की निगरानी करना और उस पर फीडबैक देना है। लेकिन उसके साथ-साथ यह उस विषय को अपने परिवेश से कैसे जोड़ा जाए, इस बारे में भी अच्‍छे से बताता है। 

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