शिक्ष्‍ािका

लोकतंत्र किसी भी समाज की सबसे बड़ी पूँजी होती है, और लोकतंत्र की बुनियाद स्कूल ही है। हमने स्कूल में विद्यार्थियों की एक परिषद शुरू की। हर वर्ष सभी विद्यार्थी इस परिषद के लिए छह या सात विद्यार्थियों को चुनते हैं। फिर पूरे स्कूल का प्रबन्धन इन विद्यार्थियों के हाथ में ही रहता है। हमने स्कूलों में होने वाले कामों को तय कर दिया है जैसे स्कूल की साफ-सफाई, पीने के पानी की व्यवस्था, प्रार्थना करवाना, मेहमानों की देखभाल, स्कूल के बगीचे का रखरखाव इत्यादि, ये सभी काम विद्यार्थियों द्वारा ही देखे जाते हैं और उनके पास निर्णय लेने का अधिकार होता है।

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