युसुफ मोहम्‍मद

अपनी बात को समेकित करते हुए वे कहते हैं कि, 'न तो आपको कक्षा को पढ़ाना है, न ही विषय को पढ़ाना है, आपको सिर्फ बच्चों की सीखने में मदद करनी है, आप बस इतना सा कर दो । ये संदेश यदि फील्ड तक पहुँच जाए तो सभी शिक्षक अच्छी तरह से काम कर सकेंगे और बच्चे सीख जाएँगे।'

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