बेडि़यापुरा

रामरतन बच्चों के बीच बैठकर पढ़ाते हैं। सारे बच्चे अपने जूते-चप्पल बाहर निकालते हैं और शिक्षक खुद भी अपने जूते कक्षा से बाहर निकालते हैं। रामरतन बताते हैं कि स्कूल वह जगह है जहाँ बच्चे को मजा आना चाहिए और अगर उसे मजा या आनन्द नहीं आएगा तो वह स्कूल मन से नहीं आएगा। बच्चे को आनन्द आए इसके लिए उन्होंने सोचा कि टी.एल.एम. से पढ़ाया जाना चाहिए। जब उनके पास संसाधन नहीं थे, तो उन्होंने शुरुआत में राखी रखने के पुष्‍टों का उपयोग कर अंक कार्ड, स्थानीय मान कार्ड, मात्रा कार्ड, अँग्रेजी के शब्द कार्ड आदि बनाए, कैमरा बनाया और उसमें अंकों और वर्णों की रील बनाकर लगाई ताकि वह बच्चों के लिए मजेदार बन सके। बच्चों के पढ़ाने के दौरान इस सामग्री का भरपूर प्रयोग किया।

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