बाल साहित्‍य

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' अंक 1, जुलाई 2018  में प्रकाशित यह लेख कहता है कि स्‍कूल में आकर विद्यार्थी पढ़ना-लिखना सीखते हैं। यह प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए कि उन्‍हें पढ़ने का चस्‍का लग सके और वे एक सक्षम पाठक बन सकें। यह जरूरी है कि विद्यार्थी जब स्‍कूल निकलें तब समक्ष और स्‍वतंत्र पाठक बनकर निकलें। सीखने में आत्‍मनिर्भरता हासिल करने और सीखने की जीवनपर्यन्‍त प्रक्रिया में शामिल होने यह एक महत्‍तपूर्ण पूर्व शर्त है। लेकिन क्‍या स्‍कूल बच्‍चे को सक्षम पाठक बना पा रहे हैं?

स्‍कूल में बच्‍चों के पुस्‍तकालय के लिए पुस्‍तकें चुनना हो या फिर घर में बच्‍चों को पाठ्यपुस्‍तकों के अलावा कुछ और पढ़ने के लिए देना हो, हमेशा यह सवाल होता है कि कौन सी पुस्‍तक चुनें। एकलव्‍य ने तीन से आठ साल तक बच्‍चों के लिए उपयोगी ऐसी ही किताबों की एक विवरणिका प्रकाशित की है। इसमें कुछ चुनिन्‍दा किताबों की चर्चा की गई और बताया गया है कि वे किस तरह उपयोगी हैं।

प्रथम बुक्‍स 2004 में रीड इण्डिया अभियान के अन्‍तर्गत शुरू हुई एक पहल है। रीड इण्डिया अभियान के तहत देश भर में बच्‍चों  में  किताब पढ़ने के प्रति रुचि पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।प्रथम बुक्‍स एक लाभकारी संस्‍था है जो बच्‍चों के लिए विभिन्‍न भारतीय भाषाओं में किताबों का प्रकाशन करती है। उनकी किताबें  इंटरनेट पर भी उपलब्‍ध हैं। प्रथम बुक्‍स के सौजन्‍य से हम उनकी कुछ उपयोगी किताबें पोर्टल पर भी उपलब्‍ध करा रहे हैं।

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