प्रयोग

मैं आपको विज्ञान का दर्शन नहीं बताने जा रहा, मैं तो आपको अपने कक्षा अनुभव से रूबरू करवा रहा हूँ। दरअसल मैंने फेसबुक के Teacher Info Point पेज पर ममता अंकित का एक वीडियो देखा जिसमें वे अपने विद्यार्थियों को प्रकाश को सीधी रेखा में चलना दिखा रही थीं। मैं भी इस टॉपिक पर कई बार कुछ गतिविधियाँ करवा चुका था। ये वीडियो मुझे बहुत पसन्द आया और कक्षा में प्रयोग करने लायक भी लगा। तो जैसे ही अवसर मिला मैंने कक्षा 6, 7 व 8 के बच्चों को कंप्यूटर कक्ष में बिठाकर उनके समक्ष ये प्रयोग करने का निर्णय लिया।

बच्चे स्वभाव से चंचल ही होते हैं। यह उनका नैसर्गिक गुण है। चंचलता के बिना बचपन भी क्या बचपन रह जाता है। सबको बच्‍चों की चंचलता लुभाती भी है और वे भी सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर ही लेते हैं। परन्तु उनकी यही चंचलता एक शिक्षक के लिए परेशानी का सबब बन जाती है और उसके लिए सिखाने में बाधा भी। क्यूँकि इसी चंचलता के कारण बच्चे कक्षा में ध्यान स्थिर नहीं कर पाते और शिक्षक कई बार उनके ध्यान को स्थिर करने के लिए भय

सुशील जोशी

पिछले भाग में हमने बात को इस सवाल पर छोड़ा था कि लैमार्क के अर्जित गुणों के हस्तान्तरण और डार्विन की विविधता में से चयन की परिकल्पनाओं के बीच फैसला जैव-विकास की अवधारणा को आगे ले जाने के लिए निर्णायक महत्व का सवाल था। हमने यह भी देखा था कि इस  दुविधा  का  समाधान  सिर्फ अवलोकनों के आधार पर नहीं हो सकता। अब आगे बढ़ते हैं।

अरविन्‍द गुप्‍ता ने विज्ञान की अवधारणाओं को समझाने के लिए कबाड़ से तमाम तरह के खिलौने और प्रयोग बनाए हैं। इस पर उनकी कई किताबें हैं। उनमें से ही एक यह है। इसमें पचास खिलौने/प्रयोग दिए गए हैं।

आग को जलाए रखने में ऑक्‍स्‍ाीजन की भूमिका होती है। जबकि उसको बुझाने में कार्बन डाय ऑक्‍साइड मदद करती है। इसे एक छोटे से प्रयोग से समझा जा सकता है।

एक पॉंच साल का बच्‍चा जब विज्ञान का प्रयोग करता है, तो न केवल वह उसे समझता है, बल्कि साथ में उसे औरों को भी समझाता है। ऐसा ही एक मजेदार वीडियो।

सुशील जोशी

अवलोकन-आधारित दुनिया

सुशील जोशी

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