नलवा

कभी बच्चों को विद्यालय के निर्धारित गणवेश में आने को लेकर बाध्य नहीं किया। बच्चे जिस भी प्रकार के कपड़ों में आते, उस पर टीका-टिप्पणी करने की बजाय वे बच्चों के साथ क्या काम करना चाहिए, इस पर ध्यान देते। आरम्भ में जब कोई बच्चा देर से भी (जैसे - लंच के बाद भी) विद्यालय आता तो वे उसे वापिस जाने को नहीं कहते बल्कि वे उसे कक्षा में बैठने की अनुमति देते।बच्चों का पढ़ाने के लिए उन्होंने सीधे पाठ्यपुस्तकों का उपयोग न करते हुए अन्य संसाधनों और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सिखाने की कोशिश की।

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