धौराभाठा

प्रभारी प्रधानपाठक राकेश चन्‍द्राकर का मानना है कि,“ जब हम लाख कोशिश के बाद भी बच्चों को सिखा नहीं पाते हैं तो इसका मतलब होता है कि सिखाने के तरीकों मे बदलाव की जरूरत है। अगर हम यह जान लेते हैं कि विद्यालय के कौन से बच्चे की सीखने की गति अन्य बच्चों से कम है तो शिक्षक का लक्ष्य तय हो जाता है कि मुझे अन्य बच्चों कि अपेक्षा उस या उन बच्चों के लिए कुछ बेहतर गतिविधि या शैक्षिक प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता है। हमारे लिए कोई भी बच्चा आगे या पिछड़ा नहीं होता है। बच्चे तो बच्चे होते हैं। हमें हरेक बच्चे को समान अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है बच्चे प्राकृतिक रूप से सीखने के लिए उत्साहित होते है। बच्चे असीमित क्षमताओं के साथ पैदा होते है हमे उनके मित्र बनकर मदद करना है। फिर देखें बच्चे कैसे सीखते हैं। ”

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