गीता वर्मा

' अभिभावकों ने ध्यान दिया तो बच्चे अब रोज स्कूल आ रहे हैं। अब उनके पास शिक्षण सामग्री भी होती है। जो स्कूल में आज पढ़ाया वही हम गृहकार्य देते हैं और लगभग सभी बच्चे अपना गृहकार्य करके लाने लगे हैं जो करके नहीं लाते उन्हें हम विद्यालय में करवाते हैं, ऐसा करने से अब बच्चे समझने लगे हैं कि अगर गृहकार्य करके नहीं ले गए तो स्कूल में तो करना ही पड़ेगा। पढ़ने-लिखने में गलती करना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है इसे अभ्यास से सुधारा जा सकता है और इसके लिए हम बच्चों को पढ़ने-लिखने के खूब अवसर किताब, कॉपी व श्यामपट्ट पर देते हैं। जिससे बच्चे एक दूसरे के द्वारा किए गए सही-गलत से ज्यादा समझते हैं और उन्हें सही-गलत का अन्तर ठीक से समझ में आ जाता है। हम बच्चों से अपने अनुभव लिखने को कहते हैं जिसे वे बड़े चाव से लिखते हैं व एक-दूसरे को सही भी करते हैं।'

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