गाँव

मुकेश मालवीय शिक्षक हैं। वे बच्‍चों के लिए कहानियाँ भी लिखते हैं। छोटे बच्‍चों के लिए लिखी गई उनकी एक कहानी को रूम टू रीड ने चित्रकथा के रूप में प्रकाशित किया है। उसकी पीडीएफ यहाँ से ली जा सकती है।

कई बार हमारी कुछ धारणाऍं ऐसे ही बन जाती हैं। लेकिन जब टूटती हैं, तो पता चलता है कि उनके बनने के पीछे कितने अधकचरे तथ्‍य थे। यह छोटी सी फिल्‍म इस बात को बहुत अच्‍छे से रेखांकित करती है। फिल्‍म शिक्षकों और बच्‍चों दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी है। जरूर देखनी चाहिए।

 

बात पुरानी है उन दिनों मैं बैतूल जिले के पावरझंडा गाँव में था। शहर से बहुत दूर जंगल से घिरा यह छोटा-सा गाँव है। गाँव में नदी के किनारे मेरा स्‍कूल था। स्‍कूल  से थोड़ी दूर एक बड़ा पहाड़ है। पहाड़ का नाम भँवरगढ़ है।

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