कहानी शिक्षण

कहानी : “गाँव का लड़का” l

लेखक जेन कोवेन–फ्लैचर (हमारे देश की तरह अफ्रीका के गाँवों में भी लोग मिल-जुलकर रहते हैं। पूरा गाँव एक परिवार की तरह होता हैं। यह उसी भाई चारे की कहानी है)।

इस कहानी को चुनने का उद्देश्य विद्यार्थियों के साथ मिलकर उनके परिवेश के विषय में जानना।

हर बार की तरह इस बार भी नया शिक्षा सत्र अप्रैल में शुरु हुआ। पर यह सत्र कुछ विशेष था। उत्तराखण्ड सरकार ने इसी साल से सभी शासकीय विद्यालयों में कक्षा एक  से  लेकर  आठवीं  तक एन.सी.ई.आर.टी.

क्या आपको गरमी के दिनों में टोपी पहनना अच्छा लगता है? इस प्यारी-सी कहानी में सुनें कि टोपी पहनना और किसको पसंद है।

कहानी शिक्षण का एक महत्वपूर्ण अंग है। हम अगर ये कहें कि कहानी से पढ़ाना बहुत ही सरल हो जाता है तो गलत न होगा। परन्तु यहाँ सोचने वाली बात यह है कि कहानी को बच्चों तक कैसे पहुँचाया जाए? जिससे कहानी बच्चों को रोचक भी लगे और साथ ही साथ वो बिना बोझ के सीख भी पाएँ।

यह कहानी एक बिल्ली के बारे में है जो उड़ना चाहती है।

मनोहर चमोली 'मनु'

अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन पौड़ी, उत्‍तराखण्‍ड के सभागार में 23 सितम्‍बर,2017 शनिवार की शाम ‘शिक्षण में कहानियों का सन्दर्भ’ पर चर्चा के नाम रही। प्रख्यात रंगकर्मी, संस्कृतिकर्मी, शिक्षा के अध्येता, बालमन के जानकार, छायाकार, फिल्म निर्माता और साहित्यकर्मी सुभाष रावत ने कहानियों के संदर्भ में बेहद कारगर और छुई-अनछुई बातों को रेखांकित किया।

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