करुणेश जोशी

जो शिक्षक अच्छा कर रहे हैं, उनके पास उसे बताने को कोई मंच न होना बहुत अखरता है। ऐसा कोई अखबार तो दुनिया में होना चाहिए, जो शिक्षकों के अच्छे काम को सामने लाये। प्राथमिक स्कूलों में शिक्षण कोई मामूली काम नहीं। मेरा तो प्रयास यही रहता है कि दोस्ती से काम लूँ। मैंने देखा है ऐसा करने से काम हो जाते हैं। सीआरजी में 14 शिक्षक अपनी इच्छा से आए हैं। इनमें अच्छे और गम्‍भीर मुद्दों पर चर्चा होती है। अधिकतर शिक्षक ऐसे प्रयोग चाहते हैं, लेकिन व्यावहारिक दिक्कतों की वजह से कर नहीं पाते। जिन स्कूलों में अभिलेखीकरण का काम अच्छा है, वहाँ दूसरे स्कूलों के शिक्षक भेजे जाते हैं। सीखने और सिखाने वाले दोनों को लाभ होता है। मैं जोर देकर कहूँगा कागजों से कुछ नहीं होता। ऐसे काम कागज दौड़ाकर नहीं हो सकते। असल प्रभाव तो शिक्षकों की आँखों में दिखता है।

हिन्दी
19173 registered users
7437 resources