एनसीएफ

मोहम्मद उमर   

एस. इन्दुमति

निशी

ज्यों-ज्यों इंसान सभ्य (खास अर्थों में) हुआ त्यों-त्यों उसने विभिन्न संस्थाओं का निर्माण किया। इन संस्थाओं के चरित्र में सुधार किए और धीरे-धीरे इंसानी दिमाग में इनकी रूढ़ छवियाँ बनती चली गईं। आप अपने आसपास इनके उदाहरण देख सकते हैं। इनमें से प्रत्येक के नाम से एक खास तरह की छवि इंसानी दिमाग में निर्मित होती है जो कि दूसरे से अलग होती है। जैसे डाकघर, पुलिस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, स्कूल, अस्पताल, परिवार आदि।

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पिछले कुछ बरसों में प्राथमिक कक्षाओं में पर्यावरण अध्‍ययन या परिवेशीय अध्‍ययन के नाम से एक नए विषय की अवधारणा सामने आई है।
राष्‍ट्रीय पाठ्यपुस्‍तक चर्चा,2005 में भी इस पर विमर्श किया गया है।
इस वीडियो में जानी-मानी शैक्षिक संस्‍था एकलव्‍य की शैक्षिक कार्यकर्ता और विषय विशेषज्ञ रश्मि पालीवाल ने 'परिवेशीय अध्‍ययन से सम्‍बन्धित चुनौतियाँ तथा पाठ्यपुस्‍तकों का स्‍वरूप' पर विस्‍तार से चर्चा की है। उनसे बात की है अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन,देहरादून के कालूराम शर्मा ने।

पिछले कुछ बरसों में प्राथमिक कक्षाओं में पर्यावरण अध्‍ययन या परिवेशीय अध्‍ययन के नाम से एक नए विषय की अवधारणा सामने आई है।
राष्‍ट्रीय पाठ्यपुस्‍तक चर्चा,2005 में भी इस पर विमर्श किया गया है।
इस वीडियो में जानी-मानी शैक्षिक संस्‍था एकलव्‍य की शैक्षिक कार्यकर्ता टुलटुल विश्‍वास ने इस पर विस्‍तार से चर्चा की है। उनसे बात की है अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन,देहरादून की प्रिया जायसवाल ने।

मनोज मिश्र

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