विचार और अनुभव

बच्‍चों में अपने परिवेश का अवलोकन एवं उसके बारे में लिखने की क्षमता बढ़ाने के लिए इस तरह के प्रयास भी किए जा सकते हैं। उत्‍तराखण्‍ड के एक अखबार अक्‍कड़-बक्‍कड़ ने यह अनोखा प्रयास किया है। नीचे दिया अखबार का यह पन्‍ना विभिन्‍न स्‍कूलों में बँटवाया गया।

चेन्नई के एक स्कूल ने अपने बच्चों को छुट्टियों का जो एसाइनमेंट दिया वो पूरी दुनिया में वायरल हो रहा है। वजह बस इतनी कि उसे बेहद सोच समझकर बनाया गया है। इसे पढ़कर अहसास होता है कि हमारा समाज वास्‍तव में कहाँ जा रहा है। सारी जिम्‍मेदारी लगता है स्‍कूल पर ही छोड़ दी है।  

अन्नाई वायलेट मैट्रीकुलेशन एण्‍ड हायर सेकेंडरी स्कूल ने बच्चों के लिए नहीं, बल्कि अभिभावकों  के लिए होमवर्क दिया है, जिसे हर अभिभावक को पढ़ना चाहिए।

मनीष : आज के समय में आधुनिक शिक्षा गाँव को किस प्रकार प्रभावित कर रही है?

किसी कार्य को सुचारू रूप से करने के लिए अभिलेखीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बिना अभिलेखीकरण के किसी कार्य को पूरी प्रमाणिकता के साथ करना लगभग असम्भव हो जाता है। एनसीएफ 2005 में अध्यापकों से की गईं अपेक्षाएँ बिना अध्यापक डायरी के पूरी नहीं हो सकती। बिना डायरी की सहायता के विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकतानुसार शिक्षित नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि अध्यापक डायरी अध्यापक की विश्वसनीय सहयोगी होती है। एनसीएफ 2005 की अपेक्षाओं को पूरा करने में अध्यापक डायरी “मील का पत्थर” साबित हो रही है।

विजय प्रकाश जैन

राष्‍ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 की बहुत चर्चा होती है। लेकिन बहुत सारे सन्‍दर्भों में राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 1986 का संज्ञान भी लिया जाना चाहिए। हिन्‍दी में इस नीति का दस्‍तावेज अब लगभग मिलता नहीं है। यहाँ उसकी पीडीएफ प्रस्‍तुत है।

शहीद भगतसिंह के जीवन पर जानेमाने जनविज्ञानी एवं संस्‍कृतिकर्मी गा़ैहर रज़ा ने एक फिल्‍म बनाई है। विद्यार्थियों को भगतसिंह तथा उनके साथियों के विचारों तथा स्‍वतंत्रता आन्‍दोलन में उनके योगदान से परिचय कराने के लिए यह एक अच्‍छा स्रोत संसाधन है।

रुद्रेश एस.

पढ़ने में रुचि बनाने के लिए पुस्तकालयों की भूमिका

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