विचार और अनुभव

अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन, पाली राजस्‍थान जिले के ब्‍लाक बाली के लर्निंग एण्‍ड रिर्सोंस सेंटर ने एक ई-पेपर निकालना आरम्‍भ किया है। इसमें शिक्षकों के अनुभव तथा अन्‍य कक्षा अनुभव प्रकाशित किए जाते हें। इसके पहले तीन अंकों की पीडीएफ यहाँ संलग्‍न है।

जरूरी है भयमुक्त वातावरण

हरफूल चन्द, राजकीय उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय, मुंडारा, बाली (पाली, राजस्थान)

अज़ीम प्रेमजी स्‍कूल,सिरोही,राजस्‍थान के शिक्षकों के अनुभवों की पत्रिका का अक्‍टूबर,2019 का अंक ।

लुबना अहमद

हम सभी...और वे सब भी अच्छे शिक्षक और शिक्षिकाएँ हैं जो अच्छे विद्यार्थी भी हों...जो हमेशा नई बातें सीखने और विद्यार्थियों के प्रबन्‍धन के नए तरीकों के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हों। कुछ नया खोजने की यही भावना उन्हें सतर्क और मुस्तैद रखती है और उनके कार्य को दिलचस्प बनाती है।

यहाँ मुद्दा यह नहीं है कि बच्चे कैसे सीखते हैं ? मुद्दा यह है कि  “हम बच्चों को कैसे सिखाते हैं? क्योंकि जब हम शिक्षक इस मुद्दे पर शैक्षिक विद्वता दिखाने का एक पल भी कभी नहीं छोडते कि बच्चे कैसे सीखते हैं ? तो फिर हमारे लिए यह जानना और समझना भी उतना ही जरूरी हो जाता हैं कि हम बच्चों को कैसे सिखाते हैं ?

मेरे प्यारे बच्चो,

विद्यालय की अवधारणा में बहुत सारी बातों, विचारों व प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है। अक्सर उन पर शिक्षक समाज में हर अवसर पर बात करने के अवसर भी निकाले जाते रहे हैं। विद्यालय की संरचना को और ठोस रूप देने या यूँ कहा जाए, कि विद्यालय के आदर्श स्वरूप को परिभाषित करने को हर शिक्षक तत्पर भी दिखाई देता है क्योंकि शिक्षक तभी शिक्षक है जब विद्यालय है। नहीं तो शिक्षक का अपना कोई स्वरूप समाज में बनता दिखाई नहीं देता। एक समय था जब शिक्षक का स्वरूप समाज में अलग तरह का था। विद्यालय के भौतिक स्वरूप व संसाधनों का इतना महत्व नहीं था

भोपाल में शिक्षकों का रचनात्‍मक मैत्री समूह 'शिक्षक सन्‍दर्भ समूह' नाम से कार्यरत है। इस समूह ने 104 विभिन्‍न शिक्षकों की शैक्षिक यात्रा तथा उनके शैक्षिक अनुभवों को एकत्र किया है। इन्‍हें एड एट एक्‍शन तथा अन्‍य संस्‍थाओं की मदद से एक किताब का रूप दिया गया है। इसका नाम है 'शिक्षकों की शैक्षिक यात्रा'।

किताब की पीडीएफ यहाँ उपलब्‍ध है

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