शैक्षिक दख़ल : स्‍कूल कुछ हटकर -2 अंक

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शिक्षकों को ही अवसर तलाशने होंगे : महेश पुनेठा । स्‍कूल को समुदाय से कैसे जोड़ा जाए : फेसबुक परिचर्चा । यास्‍नाया पोल्‍याना : एक नामु‍मकिन सा सपना – रविकांत । बाल सहयोगी है गिजूभाई का दिवास्‍वप्‍न : मौहम्‍मद औवेश । नोहर चन्‍द्रा की पाठशाला : भास्‍कर चौधुरी । सृजन के मधुर गीत गाता एक विद्यालय : प्रमोद दीक्षित ‘मलय’ । घण्‍टी एक तरह की गुलामी : विपिन जोशी । जहाँ बच्‍चे खुद करते हैं : राजीव जोशी । अकेले टेक्‍नोलॉजी नहीं है, स्‍कूलों की बीमारी का इलाज : कोंटारो टोमाया । कॉल सेन्‍टर (कहानी) : विजय गौड़ । एक झन्‍नाटेदार थप्‍पड़ (बचपन) : अनिल कार्की । बच्‍चों तथा विद्यालयों में रचनात्‍मकता : डॉ. नंद किशोर हटवाल । बच्‍चों की शिक्षा में बदलाव की जरूरत : रमेश उपाध्‍याय (साक्षात्‍कार) । जोशी सर, पुस्‍तकालय,दीवार पत्रिका और मैं : संजय कापड़ी । साठ घंटे की पाठशाला ( जीवन जागृति निकेतन विद्यालय) । शिक्षक के मनोविज्ञान का भी ध्‍यान रखना जरूरी : नितेश वर्मा किताब पढ़ना यानि आगे बढ़ना (बाल साहित्‍य) : मनोहर मनु क्‍या निजीकरण में है सरकारी शिक्षा का इलाज : दिनेश कर्नाटक
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