शैक्षिक दख़ल : जुलाई,2018

Description: 
अभिमत । टयूशन या कोचिंग से ज्ञान सृजन संभव नहीं : महेश पुनेठा । एक शिक्षक के मायने : शिवरतन थानवी-सूर्यप्रकाश श्रीनागर । टयूशन के पीछे है, माँ-बाप की महत्‍वाकांक्षा का प्रेत : परिचर्चा ।बच्‍चों का मनोवैज्ञानिक हत्‍याकांड : लोगों की राय । क्विज मास्‍टर (कहानी) : पंकज मिश्रा। विद्यालय, टयूशन एवं रचनात्‍मकता : डॉ. केवलानंद कांडपाल । टयूशन,असल,नकद और सूद भी लेता है : मनोहर चमोली ‘मनु’ । प्रतियोगिताओं की दौड़ : अनुपमा तिवाड़ी । टयूशन/ कोचिंग के चक्रव्‍यूह और हमारे मासूम अभिमन्‍यु : प्रतिभा कटियार । गर छूना हो आसमां : सुनील शर्मा । भविष्‍य की कीमत पर वर्तमान की बलि : वंदना शुक्‍ला । टयूशन, शिक्षा और रचनात्‍मकता : विजय गौड़ । बोझ में तब्‍दील होता बस्‍ता : दिनेश रावत । टयूशन और शिक्षा का ताना-बाना : अखिलेश यादव। पुस्‍तकालय ने पठन-पाठन और लेखन का पैदा किया शौक : डॉ.(इंजी) आलोक सक्‍सेना। उच्‍च शिक्षा बनाम कोचिंग उद्योग का ताना बाना: डॉ. निर्मल कुमार न्‍योलिया। रचनात्‍मकता तथा बेहतर मानवीय समाज की राह : विमला कश्‍यप। फून सूक बांगड़ : शशि सिंह। क्‍या टयूशन किताबों से दोस्‍ती करा सकता है ? : नीरज पंत। तब बहुत कम बच्‍चे टयूशन जाते थे : बसंत गिरी। राष्‍ट्रीय बालरंग महोत्‍सव की एक झलक : रमेश चन्‍द्र जोशी । सामाजिक समरसता का पाठ पढ़ाने वाले गुरुजी : डॉ. अरुण कुकसाल। इस बार का बालसाहित्‍य : मनोहर चमोली ‘मनु’। जन शिक्षा को निगलता टयूशन का बाजार : राजीव जोशी टयूशन-कोचिंग का बाजार तथा पढ़ने-लिखने की संस्‍कृति : दिनेश कर्नाटक
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