शैक्षिक दखल : अंक 9 जनवरी 2017

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पढ़ने की आदत को आंदोलन बनाने की जरूरत : महेश पुनेठा । हर शिक्षक के ज्ञान की सीमा होती है किताब : शरद चंद्र बेहार । बच्‍चे किताब नहीं पढ़ते, क्‍योंकि माता-पिता किताबें नहीं पढ़ते : जार्डन सैपाइरो । पढ़ने की संस्‍कृति मतलब किताब से दोस्‍ती : कैलाश मण्‍डलोई । लिखने के लिए पढ़ना जरूरी है : लोकेश ठाकुर । पढ़ने की संस्‍कृति में सहायक है दीवार पत्रिका : डॉ. केवलानंद कांडपाल शैक्षिक गुणवत्‍ता बनाम पढ़ने-लिखने की संस्‍कृति : रमेशचन्‍द्र जोशी । पुस्‍तकें: मेरी दोस्‍त, मेरा ईश्‍वर : प्रेमपाल शर्मा । किताबों को पढ़ने का भी पाठ्यक्रम बनाना होगा : राजेश उत्‍साही से साक्षात्‍कार । विदेशों में पढ़ने की संस्‍कृति : डॉ.जीवनसिंह । एक कतरा उजास : सोनी मणि पाण्‍डेय । पुस्‍तक संस्‍कृति विकसित करने की जरूरत है : राजीव जोशी । कहानी : कैद में किताबें : दिनेश कर्नाटक

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