राष्ट्रीय ज्ञान आयोग

राष्ट्रीय ज्ञान आयोग:
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की स्थापना 13 जून 2005 को हुई थी। यह भारत के प्रधानमन्त्री की सलाह के लिए स्थापित उच्च-स्तरीय सलाहकार संस्था है। इसका काम नीति निर्देशन तथा सुधारों की दिशा तय करना है। शिक्षा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी, कृषि, उद्योग, ई-प्रशासन जैसे कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों आदि पर ध्यान केन्द्रित करना भी इसके कार्य का हिस्सा है। ज्ञान को सुलभ बनाना, ज्ञान व्यवस्थाओं की रचना और उनका संरक्षण, ज्ञान तथा बेहतर ज्ञान सेवाओं का फैलाव इस आयोग के लिए मुख्य चिन्ता के विषय हैं।

राष्ट्रीय ज्ञान आयोग का टीचर्स पोर्टल में योगदान

राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने ज्ञान एकत्रण एवं उसके प्रसार के लिए विकास सेक्टर के कुछ क्षेत्र चिह्नित किए हैं। ऊर्जा, पर्यावरण, शिक्षा, जैव-विविधता तथा जल भी इनमें शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कार्य कर रही कुछ मुख्य संस्थाओं एवं संगठनों को एक ऑनलाइन मंच के निर्माण और उसके प्रबन्धन के लिए आमन्त्रित किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों के लिए ऐसे मंच को विकसित करने हेतु आयोग ने अज़ीम प्रेमजी फाउण्डेशन को आमन्त्रित किया। इस मंच की शुरुआत करने के लिए आयोग ने कार्यशालाओं और बैठकों का आयोजन किया। उद्देश्य था कि एक ऐसे पोर्टल की स्थापना हो जो परस्पर अन्त:क्रिया का एक नियमित मंच बने। जहाँ बेहतर परिपाटियों को साझा किया जा सके। जहाँ ज्ञान का ऐसा ढाँचा कायम हो जो शिक्षकों को अपने अनुभव के माध्यम से मौजूदा ज्ञान तक पहुँचने, उसे लागू करने और उसकी महत्‍ता को बढ़ाने हेतु प्रेरित करे। टीचर्स पोर्टल की परिकल्पना राष्ट्रीय ज्ञान आयोग तथा अज़ीम प्रेमजी फाउण्डेशन द्वारा संयुक्त रूप से की गई। अब इसे अज़ीम प्रेमजी फाउण्डेशन द्वारा संचालित किया जा रहा है। 

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