प्रकृति से स्नेह

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बुनियादी जानकारी

विज्ञान एक ऐसा विषय है जो प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष अवलोकन के जरिए सूचना संग्रह एवं विभिन्न तरीकों से इन सूचनाओं के परीक्षण पर आधारित है। चूँकि अध्यापक पाठ्यक्रम और उसे पूरा करने के लिए निर्धारित समय सीमा से बँधे होते हैं, अक्‍सर वे पढ़ाने की निर्देशात्‍मक शैली अपनाते हैं, जिसमें पाठ की तैयारी एवं उसे पढ़ाने में ज्‍यादा वक्‍त नहीं लगता। बच्‍चे ‘ज्ञान’ अर्जित करते हैं, लेकिन वे इस ज्ञान का ‘उपयोग’ करना नहीं सीख पाते। यह अभ्यास योजना ‘वास्‍तविक’ अनुभवों को ‘शिक्षा’ से जोड़ने की दिशा में किया गया प्रयास है। 

पाठ योजना विवरण

अवधि : 
03 hours 00 mins
परिचय: 

विज्ञान एक ऐसा विषय है जो प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष अवलोकन के जरिए सूचना संग्रह एवं विभिन्न तरीकों से इन सूचनाओं के परीक्षण पर आधारित है। चूँकि अध्यापक पाठ्यक्रम और उसे पूरा करने के लिए निर्धारित समय सीमा से बँधे होते हैं, अक्‍सर वे पढ़ाने की निर्देशात्‍मक शैली अपनाते हैं, जिसमें पाठ की तैयारी एवं उसे पढ़ाने में ज्‍यादा वक्‍त नहीं लगता। बच्‍चे ‘ज्ञान’ अर्जित करते हैं, लेकिन वे इस ज्ञान का ‘उपयोग’ करना नहीं सीख पाते। यह अभ्यास योजना ‘वास्‍तविक’ अनुभवों को ‘शिक्षा’ से जोड़ने की दिशा में किया गया प्रयास है। 

उद्देश्‍य : 
  • अपने आसपास की चीजों के साथ सरोकार विकसित करने में बच्‍चों की मदद करना ।
  • सूक्ष्‍मता से अवलोकन करने में उनकी मदद करना ताकि वे चीजों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
  • बच्‍चे श्रेणीकरण और वर्गीकरण सीख सकें
चरण : 

हमारा परिवेश एवं प्रकृति

विद्यार्थियों से कहें कि वे प्राकृतिक पर्यावरण का अवलोकन सूक्ष्‍मता से करें। वे यह जानकारी एकत्रित करें कि उनके घर एवं मुहल्‍ले के आसपास किस तरह के पेड़-पौधे उगते हैं और क्‍यों उगते हैं। मौसम की स्थिति, मिट्टी के प्रकार इत्‍यादि।  जानकारी हासिल करने के लिए वे अपने परिवार के सदस्‍यों, पड़ोसियों एवं मित्रों से सम्‍पर्क कर सकते हैं। इस बहाने अपने आसपास के लोगों के साथ बेहतर ढंग से संवाद भी कर सकते हैं। वे अपने स्‍कूल परिसर में मौजूद पेड़-पौधों का अवलोकन भी करें। यहाँ, वे अपने शिक्षकों एवं अन्‍य कर्मचारियों दोनों से सम्‍पर्क कर सकते हैं।

पौधों की प्रोफाइल

बच्‍चों को अपने आसपास सहजता से उपलब्‍ध पौधों के बारे में और अधिक अनुसन्धान करने को प्रेरित करें। वे निम्‍नलिखित जानकारियाँ हासिल कर सकते हैं:

  • पौधे का वैज्ञानिक नाम,
  • उत्‍पत्ति स्‍थल,
  • उस पौधे के विकास के लिए जरूरी वातावरण इत्‍यादि।
  • आप इस सूची में अपने बिन्दु भी जोड़ सकते हैं।

बच्‍चे अपने पुस्‍तकालय में उपलब्‍ध शैक्षणिक संसाधनों की मदद भी ले सकते हैं, मसलन वनस्‍पतिशास्‍त्र से सम्बन्धित पुस्‍तकें या इनसाइक्‍लोपीडिया। उन्‍हें डिस्‍कवरी एवं नेशनल जियोग्राफिक जैसे चैनल देखने के लिए प्रेरित करें। इससे भी उन्हें जरूरी सूचनाएँ मिल सकती हैं। सूचनाओं के लिए वे इन्‍टरनेट का इस्‍तेमाल भी कर सकते हैं।

पौधों की प्रोफाइल में वे पौधे का चित्र बना सकते हैं, उसे लेबल कर सकते हैं और उसके बारे में विस्‍तृत एवं व्‍यवस्थित रिपोर्ट लिख सकते हैं। इन रिपोर्टों पर कक्षा में विस्‍तार से चर्चा की जा सकती है। इसके बाद ऐसे प्रोफाइल को कक्षा की दीवारों पर दर्शाया जा सकता है।(

पौधों को लेबल करने में भी कुछ नयापन ला सकते हैं।  नाम के लिए उन देशों की भाषा का इस्‍तेमाल करें, जहाँ उन पौधों की उत्‍पत्ति हुई थी।

विद्यार्थियों से कहें कि वे हमारे जीवन में पौधों की पाँच महत्‍वपूर्ण भूमिकाओं की एक सूची बनाएँ। उदाहरण के लिए, कुछ पौधों से हमें खाद्य सामग्रियाँ मिलती हैं, कुछ हमारे घरों को सजाते हैं, कुछ पौधों से हमें अपने परिधान के लिए सामग्रियाँ मिलती हैं, इत्‍यादि। वे इस आधार पर वृक्षों एवं पौधों का वर्गीकरण कर सकते हैं - सजावटी पौधे, खाद्य पौधे इत्‍यादि।

एक बगीचे में राष्‍ट्र

मिट्टी का संरक्षण पर्यावरण शिक्षा का एक महत्‍वपूर्ण पहलू है। यहाँ विद्यार्थियों के लिए एक गतिविधि दी जा रही है, जिसकी मदद से वे कुछ अन्‍य विषयों में भी अपने कौशल को आजमा सकते हैं। बच्‍चों को सबसे पहले अपने स्‍कूल के मैदान में एक बगीचा तैयार करना और उसमें समूचे विश्‍व को दर्शाना होगा।

बच्‍चों से कहें कि वे पूरे विश्‍व के मानचित्र का अध्‍ययन पूरे मनोयोग से करें। अब, खेल के मैदान के एक चौरस हिस्‍से में उन्‍हें मानचित्र को देखकर एक छड़ी की मदद से सभी महाद्वीपों की आकृति रेखा खींचने को कहें। उसमें टापुओं को भी शामिल करें। इसके बाद विभिन्न देशों की आकृति रेखाएँ खींचें। यह भूगोल का एक बेहद दिलचस्‍प अभ्‍यास साबित होगा।

विभिन्न देशों की आकृति एवं आकार आनुपातिक होने चाहिए। इसलिए, बच्‍चों से कहें कि वे मानचित्र पर रेखाओं की माप लें, महाद्वीपों एवं देशों की आकृति रेखाएँ खींचने से पहले उनकी आकृति एवं आकार की गणना करें। इसके लिए बच्‍चों को तर्कक्षमता एवं गणितीय कौशल का इस्‍तेमाल करना होगा।

अब बगीचे को जीवन्त बनाएँ। कुछ बीज लें और विश्‍व मानचित्र की आकृति रेखा के किनारों पर उन्‍हें बो दें। पूरी कक्षा को विभिन्न समूहों में विभाजित करें और प्रत्‍येक समूह को क्रमवार एक-एक हफ्ते इसकी देखभाल करने,उसमें पानी देने और खाद की मदद से पौधों को विकसित करने, की जिम्‍मेवारी दें। यह विज्ञान के लिए एक बेहतरीन अभ्‍यास है। जरा सोचें कि कुछ ही दिनों में जब वे बीज जीवन्त एवं रंग-बिरंगे पौधों में तब्‍दील हो जाएँगे तब उन्‍हें देखकर बच्‍चों को कितना आनन्द आएगा।

इस गतिविधि का उपयोग उन्हें अलग-अलग देशों के बारे में जानकारी देने के लिए भी किया जा सकता है। इसकी शुरुआत विभिन्न  देशों के मूल पेड़-पौधों के बारे में जानकारी देने से करें। यहाँ, कई देशों के कुछ मूल सजावटी और खाद्य पौधों की नमूना सूची दी गई है।   

सजावटी पौधे

चीन : बुढ्लिआ, मेक्सिकन ऑरेंज ब्लॉसम, जैसमिन, चाइनीज लेनर्टन, आईस प्लान्ट, विस्टेरिया, अजलिया, रोडोडेन्ड्रॉन

अफ्रीका : पेपिरस, रेड हॉट पोकर, पेलार्गोनियम, फ्रिसीया, बिजी लिज्जी, केप डेजी

उत्तरी अमेरिका : इवनिंग प्रिमरोज, गोडेनरॉड, पोच्ड एग प्लान्ट, माइकेलमास डेजी, सनफ्लावर, वर्जीनिया क्रीपर, ब्लैक-आईड सूसन, फाल्स अकासिया, वाटर फर्न (अज़ोला), कॉमन अमरांथ, ओरनामेन्टल करेन्ट

जापान : जापानी मैपल, क्विन्स, ब्लीडिन्ग हर्ट, टाईगर लिली, क्रैब एप्पल

खाद्य पौधे

भारत : भिंडी, बैंगन, पालक, खीरा, काली मिर्च

रूस/पोलैंड : पत्तागोभी, चुकन्दर

दक्षिण अमेरिका : आलू, टमाटर

नार्वे : जामुन, मशरूम

बच्चों से प्रश्न पूछें, कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं

  • कुछ ऐसे खाद्य पौधों के नाम पूछें जो हमारे देश में होते हैं और कुछ ऐसे पौधे जो दूसरे देशों में होते है।
  • कुछ ऐसे खाद्य के नाम पूछें जिन्हें आयात किया जाता है ।
  • पौधों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानान्तरित करने का पर्यावरणीय प्रभाव क्या है?

आलू, चावल, मकई और अनाज जैसे पौधे ऐसे मामलों तथा विश्व खाद्य के दूसरे मसलों का परीक्षण करने के लिए अच्छा आधार बना सकते हैं। बच्चों को कुछ देशों के नाम दें और उनसे उन देशों के धर्म और संस्कृति से जुड़े हुए पौधों का पता लगाने के लिए कहें।

विविध गतिविधियाँ

इसके अतिरिक्‍त, बच्‍चों में पर्यावरण के प्रति दिलचस्‍पी और स्‍नेह जागृत करने के लिए आप निम्‍नलिखित गतिविधियाँ भी संचालित कर सकते हैं।

  • बच्‍चे, जहाँ भी और जब भी सम्भव हो, पौधे लगाएँ।
  • प्रकृति एवं पर्यावरण पर आधारित कई फिल्‍में हैं। बच्‍चों को इनमें से कुछ फिल्‍में, मसलन गिरीश कर्नाड की फिल्‍म चेलुवी, दिखायी जा सकती हैं।
  • कक्षा का प्रत्‍येक बच्‍चा किसी एक वृक्ष या पौधे की भूमिका अदा कर सकता है और दो मिनट की एक प्रस्तुति/प्रेजेन्टेशन में इसके बारे में कुछ बोल सकता है।
  • स्‍कूल जुलाई के प्रथम हफ्ते में वन महोत्‍सव का आयोजन कर सकता है। उस दिन, बच्‍चे स्‍कूल परिसर में पौधे लगा सकते हैं। यदि पहले से काफी वृक्ष मौजूद हैं और स्‍थान सीमित है, तो वे उस दिन माली के स्‍थान पर स्‍वयं पौधों की देखभाल की जिम्‍मेवारी ले सकते हैं और पौधों में हर दिन पानी देने की प्रतिज्ञा कर सकते हैं।
  • कक्षा में वाद-विवाद आयोजित करें। बच्‍चों को पर्यावरण से सम्‍बन्धित कुछ विषय दें, उदाहरण के लिए, ‘क्‍या आदिवासियों को उनके प्राकृतिक वासस्‍थल से विस्‍थापित कर समाज की मुख्‍यधारा में शामिल होने के लिए प्रेरित करना चाहिए?’, या ‘क्‍या हमें कागज का न्‍यूनतम इस्‍तेमाल करना चाहिए?’ अब कक्षा को दो समूहों में विभाजित कर दें और एक समूह विषय के पक्ष में तर्क दे और दूसरा उसके विरोध में।
  • विद्यार्थी पर्यावरण से सम्बन्धित आन्दोलनों, मसलन हरित क्रान्ति, चिपको आन्दोलन इत्‍यादि के बारे में विस्‍तार से जानकारी एकत्रित कर सकते हैं।
  • थोड़े प्रयास से, बच्‍चे अपने लिए एक सुन्दर-सा किचन गार्डेन भी बना सकते हैं। करेला, सरसों, बैंगन, टमाटर, नीबू, मिर्च, मेथी एवं करी पत्ता/मीठा नीम जैसे पौधे आसानी से उगते हैं। वे स्‍कूल के माली से या शहर की किसी नर्सरी के कर्मचारी से सलाह-मशविरा कर सकते हैं और उनसे सूचना और मार्गदर्शन हासिल कर सकते हैं।

इतना कुछ करने के बाद आप यह देखेंगे कि आपके विद्यार्थियों ने प्रकृति के साथ गहरा रिश्‍ता स्‍थापित कर लिया है।


 

(यह टीचर प्लस, अंक 67, जुलाई-अगस्त 2000 में प्रकाशित लेख का सम्‍पादित हिन्‍दी अनुवाद है।)  

 

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इसे कक्षा शिक्षण प्रयोग कर सकते हैं