शुरुआती पाठकों के लिए बाल साहित्‍य - कुछ सवाल : चन्‍दन यादव

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' अंक 1, जुलाई 2018  में प्रकाशित यह लेख कहता है कि स्‍कूल में आकर विद्यार्थी पढ़ना-लिखना सीखते हैं। यह प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए कि उन्‍हें पढ़ने का चस्‍का लग सके और वे एक सक्षम पाठक बन सकें। यह जरूरी है कि विद्यार्थी जब स्‍कूल निकलें तब समक्ष और स्‍वतंत्र पाठक बनकर निकलें। सीखने में आत्‍मनिर्भरता हासिल करने और सीखने की जीवनपर्यन्‍त प्रक्रिया में शामिल होने यह एक महत्‍तपूर्ण पूर्व शर्त है। लेकिन क्‍या स्‍कूल बच्‍चे को सक्षम पाठक बना पा रहे हैं? पढ़ना-लिखना सिखाने की प्रक्रिया में कुछ तो ऐसा है कि बच्‍चे अक्षर ज्ञान और मात्रा ज्ञान के बाद किसी तरह जोड़-जोड़ कर पढ़ना सीख भी लेते हैं तब भी किताबों से उनकी  दोस्‍ती नहीं हो पाती है। यह लेख ऐसे ही कई सवालों की पड़ताल करता है।

पूरा लेख नीचे दी गई लिंक से डाउनलोड किया जा सकता है।

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