बड़ी संख्‍याओं की रहस्‍यमयी दुनिया

हम तेजी से बढ़ती हुई एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहाँ ऐसा प्रतीत होता है जैसे सभी दिशाओं से बड़ी संख्‍याओं की बमबारी हो रही हो। वैश्‍वीकरण और ज्ञान के विस्‍फोट का धन्‍यवाद, जिसकी वजह से नियमित रूप से हमारा सामना बहुत बड़ी-बड़ी संख्‍याओं से होता है। फिर भी, यहाँ एक प्रासंगिक सवाल यह उठता है कि ‘क्‍या इन संख्‍याओं से होता सामना इन संख्‍याओं के आकार की समझ बनाने का कारण बनता है?’ या फिर यह सम्‍भव है कि इन संख्‍याओं के निरन्‍तर उपयोग के कारण हम इनके आकार को कुछ कम करके आँकते हैं।  क्‍या इन संख्‍याओं से अत्‍याधिक परिचय सही दृष्टिकोण विकसित करने में बाधक है? इसके अलावा, क्‍या बड़ी संख्‍याओं की समझ में कमी इनके इस्‍तेमाल में अप्रभावी व्‍याख्‍या और विचार का कारण नहीं बनेगी?

दुनिया के बारे में हमारी और विद्यार्थियों की समझ तब तक अधूरी है जब त‍क कि हम इन संख्‍याओं के आकार और इनके दायरे को समझने में सक्षम नहीं होते। हालाँकि, कई लोगों के लिए दस हजार और एक लाख (सौ हजार) जैसी अपेक्षाकृत छोटी संख्‍याओं को समझना या इनकी कल्‍पना करना भी मुश्किल हो सकता है। किसी वस्‍तु की दस हजार इकाइयाँ हमें कब दिखती हैं? क्‍या हमारे रोजमर्रा के अनुभवों में इस तरह की संख्‍याएँ शामिल होती हैं?


At Right Angles (a resource for school mathematics) Volume 6, N0.2 August 2017
Pullout : Secret World of Large Numbers  का हिन्‍दी अनुवाद

पद्मप्रिया शिराली 

 

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