शिक्षा व्यवस्था ,मूल्यांकन

By Dr.Ghanshyam Bhatt | अप्रैल 2, 2013

कुछ दिन पूर्व  कक्षा ९वीं तक के परीक्षा परिणाम घोषित हुए ८वीं तक सरकार के नियमानुसार सभी उत्तीर्ण हुए .कक्षा ९ में मेरे विद्यालय में ३ बच्चे अनुत्तीर्ण हुए जिनमें एक लड़की दो लड़के थे . लड़की सबसे कमजोर थी, उसे अभी तक न तो पड़ना आता है न वर्णमाला का ही सही ज्ञान है. लड़की सिर्फ हिंदी यानि मेरे विषय में फेल थी सभी अध्यापको ने लड़की होने के तर्क के आधार पर उसे पास कर दिया .उस लड़की के पिता आज मेरे कमरे में आये थे और पूछने लगे की क्या बात हो गयी?मेरी लड़की क्यों फेल कर दी ? मैं गरीब आदमी हूँ आदि.तीनों अभिभावक विद्यालय आकर बच्चों को पास करने को कहते है.सभी अध्यापक अच्छे है और मैं  दोषी,फेल करने का क्रेडिट मुझे . मुझे सही कार्य करने के बाद भी क्यों खुद को सही साबित करने की आवश्यकता पड़ती है ?? बच्चे कक्षा ६ अथवा ९ में बिना वर्ण बोध अथवा बिना मात्रा ज्ञान के आते है .जबकि अपने विद्यालय में,कमजोर छात्रों हेतु प्रत्येक नए सत्र की शुरुवात में आधारभूत पाठ्यक्रम का सञ्चालन मैं अपने स्तर से करता हूँ .मैं समर्पित होकर साल भर पढाता हूँ मुझे मूल्यांकन करने का अधिकार नहीं है क्या ??  अभिभावक क्यों शिक्षा के बदले प्रमाण पत्र की मांग करते है ?? सरकारी व्यवस्थाओं का दुरूपयोग क्यों हो रहा है ???

 क्यों सरकारी शिक्षक मन से पढ़ाना नहीं चाहता ???

 निजी विद्यालय में खर्च अधिक होता है फिर क्यों अभिभावक उनमें पढ़ाने पर स्वयं को गोरवान्वित समझते है ???

 सच्चाई ,नैतिकता ,ईमानदारी आदि मूल्य कहां गए?? किताबो की सुंदरता बड़ाने तक ही सीमित रह गए है क्या ???

 क्या नियम कानून शिर्फ दिखाने के लिए ही होते है ??

Imran Khan का छायाचित्र

घनश्याम जी आप निराश न हो ..... सच्चाई ,नैतिकता ,ईमानदारी आदि मूल्य मानवता के आधार है जो कभी ख़त्म नहीं हो सकते .... शिक्षा जगत में दोनों प्रकार के अध्यापक मिल जायेंगे बहुत मेहनती और कर्मठ .....व आलसी और निकम्मे
....सदा से है और भविष्य में भी रहेंगे....पर इतना सुनिश्चित है की ये जहाँ काम करने वालों के भरोसे चला है और चलेगा .....
अतः आप लगातार अपना काम करते रहे निराश होने की कोई जरुरत नहीं है....:)

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