जिम्‍मेदार कौन ?

By editor_hi | सितंबर 11, 2013

इस शिक्षक दिवस पर एक शिक्षक ने अपना एक निजी अनुभव सुनाया। उन्होंने बताया कि-

कुछ दिन पूर्व मेरे स्कूल में पैदल धार्मिक यात्रा पर जाने वाले यात्रियों का जत्था आकर रुक गया। इसके लिए उन्होंने स्कूल प्रशासन से भी बात नहीं की और वहाँ अपना सामान रख दिया। सुबह मैं जब स्कूल पहुँचा तो स्कूल में जोर से गीत-संगीत बजने की आवाजें आ रही थीं। जब जत्थे के दल नायक से बात की तो पता चला कि धार्मिक पद यात्रा वाले रुके हुए हैं। भंडारा चलेगा आठ-नौ दिनों तक। क्योंकि मेरा स्कूल था तो मैंने इस पर आपत्ति जताई। आपत्ति जताने पर उन्होंने मुझे नास्तिक कहा। मैंने उन्हें समझाने का प्रयास किया, कि यह स्कूल है बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है आप अपनी व्‍यवस्‍था कहीं और कर लीजिए। लेकिन वह नहीं माने। गाँव वालों से बात की लेकिन वह भी उन्हीं लोगों के पक्ष में थे। मैंने ज्यादा दबाव बनाया तो उन्होंने मुझे डराया धमकाया और मेरे उच्च अधिकारियों से बात कराने की धमकी भी दी।

मैनें अधिकारियों से बात की, अधिकारियों ने भी उन्हीं लोगों का साथ दिया। अन्ततः आठ दिनों तक उनका स्कूल में भंडारा चलता रहा। हाँ उन्होंने इतनी मेहरबानी जरूर की कि स्कूल समय में गीत-संगीत नहीं बजाया वह भी काफी समझाने के बाद। उनके सामने हमारे प्रशासनिक कर्ताधर्ता भी नतमस्तक हो गए। जबकि न्‍यायालय का आदेश है कि स्कूलों में इस तरह के कोई कार्यक्रम स्कूल समय में नहीं किए जा सकते हैं।

शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक ने अपनी वेदना यह कहते हुए प्रकट की कि साहब एक शिक्षक  की आज इस समाज में कोई सुनने वाला नहीं है। उपरोक्त उदाहरण जो शिक्षक द्वारा रखा गया यह सच में हमारी व्यवस्था व समाज पर एक बड़ा सवालिया निशान है। सवाल है कि इस स्थिति के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? क्या समाज? प्रशासन ? न्याय पालिका ? धर्म के नाम पर किया जा रहा पाखण्ड? या शिक्षक और हमारी स्कूल व्यवस्था ?

0 राकेश कारपेन्‍टर,ब्‍लाक रिसोर्स परसन,निवाई,टोंक, राजस्‍थान

Manoj kumar का छायाचित्र

इस तरह की घटनाएँ सरकारी विद्यालयों के लिए आम है.हमारा समाज आज भी स्कूल की महत्ता को स्वीकार नही करता है ,स्कूल मात्र एक सरकारी भवन बन कर रह गया है.समाज और सरकार दोनों को साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है.

editor_hi का छायाचित्र

यही बात राकेश अपनी टिप्‍पणी में उठा रहे हैं। -संपादक

Imran Khan का छायाचित्र

शिक्षक के साथ कौन है.........??
यदि शिक्षक काफी मेहनती है तो सिर्फ बच्चे अन्यथा कोई नहीं.....
समाज के लिए....समाज के तथाकथित नेताओं के लिए तो शिक्षक एक आसान शिकार है ....जहाँ से वो अपनी ताकत और पॉवर की पहचान प्रदर्शित करते है....
.....आज शिक्षक का मान जैसे शब्द तो ......किताबी से लगते है .......क्या वर्तमान समाज में शिक्षक सर्वाधिक कमजोर नजर नहीं आता जिस पर कोई भी टिप्पणी नहीं कर देता है ......??
रहे अधिकारी......अधिकतर रचनात्मक शिक्षकों को प्रोत्साहित तो कभी नहीं करते परन्तु उनके खिलाफ कोई सूचना आने पर बाल की खाल जरूर निकालते है........
---आज आगे बढ़ कर कुछ करने वाले शिक्षक सिर्फ नुकसान के कुछ नहीं पाते ................. या फिर संतोष के लिए कह दे आत्म - संतुष्ठी

editor_hi का छायाचित्र

शुक्रिया।

om parkash sharma का छायाचित्र

इसी कारण विद्यालय में विद्यालय प्रबन्धन समिति का गठन किया गया है ताकि अपने बच्चो के हित के लिए समाज अपनी भागेदारी निभा सके। यदि आपके और अभिभावकों के मध्य ताल मेल सही है तो वे आपकी समस्या के समाधान के लिए स्वयं सामने आएँगे और उनके निर्णय पर आपत्ति नहीं उठाई जाएगी। हाँ उनको जागरूक करने की आवश्यकता है अन्यथा अध्यापक का स्थानातरण तो किया जा सकता है पर उसकी मदद करने वाले अधिकारी बिरले ही हैं। परंतु विद्यालय प्रबन्धन समिति अवश्य जिम्मेदारी ले सकती है।

editor_hi का छायाचित्र

शुक्रिया।

pramodkumar का छायाचित्र

प्रश्न यहाँ यह है कि शिक्षक का सम्बन्ध बच्चों ,अभिभावकों एवं समुदाय के साथ कैसे है १ यदि शिक्षक अपनी जिम्मेवारी ठीक तरह से निभा रहा है ,बच्चो के साथ मैत्रीपूर्ण रिश्ता है ,समुदाय को विद्यालय से जोड़ पाया है तो ऐसी कोई समस्या नही होगी ।

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