सामग्री भेजने के लिए दिशा निर्देश

टीचर्स ऑफ इण्डिया www.teachersofindia.org शिक्षकों के लिए परस्पर आदान-प्रदान, चर्चा और विमर्श का स्थान है। संसाधनों की रचना और उन्हें साझा करने की जगह है। यह मुख्य तौर से भारत के शासकीय प्रारम्भिक स्कूलों के शिक्षकों के लिए है। टीचर्स ऑफ इण्डिया  की नीति और संकल्पना है कि शिक्षकों को उपयोग के लिए सामग्री उनकी अपनी भाषा में मिले। इस समय पोर्टल पर चार भारतीय भाषाओं हिन्‍दी,कन्‍नड़, तमिल तथा तेलुगू एवं अंग्रेजी में सामग्री उपलब्ध है। कोशिश है किसी भाषा में उपलब्ध गुणवत्‍तापूर्ण सामग्री अनूदित होकर दूसरी भाषाओं में भी उपलब्‍ध हो।

यहाँ दिए जा रहे दिशा-निर्देश इस उद्देश्‍य से बनाए गए हैं ताकि सामग्री तैयार होकर पोर्टल तक पहुँचने की प्रक्रिया सरल और सहज हो। सामग्री भेजने के पहले, कृपया इस सामग्री सम्बन्धी नीति को पढ़ लें।

पोर्टल पर सामग्री के दो मुख्य क्षेत्र शिक्षक विकास और कक्षा संसाधन हैं। कक्षा संसाधन जिन्हें शिक्षक कक्षा में पढ़ाते हुए प्रयोग कर सकते हैं, तथा शिक्षक विकास से सम्‍बन्धित सामग्री जो शिक्षक के पेशेगत विकास में मददगार हो। ये संसाधन तथा सामग्री विभिन्न रूपों में हो सकती है – लिखित शब्द, ऑडियो, वीडियो आदि।

समुदाय में चर्चा के अन्‍तर्गत शिक्षकों के बीच विचारों के स्वतन्त्र आदान-प्रदान के लिए एक खुला मंच है। इसके लिए सामग्री उपयोगकर्ताओं द्वारा ही जुटाई जाती है। इसमें भाषा तथा विषय़वस्तु की शालीनता तथा उपयुक्तता सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम मध्यस्थता की जाती है। टीचर्स पोर्टल का प्रयास है कि शिक्षा और विकास के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण विचारों और सिद्धान्तों पर परिपक्व बातचीत को बढ़ावा दिया जाए। चर्चा करते हुए हम विचारों का तार्किक आदान-प्रदान करें। बिना किसी दूसरे पक्ष को कोई ठेस पहुँचाए शालीनता के साथ अपने नजरिए को दृढ़ता से रखें।

पोर्टल पर प्रकाशित संसाधन तथा सामग्री किसी विशेष सन्दर्भ से सम्बन्धित हो सकती है, मगर उठाए गए और विश्लेषित मुद्दे ऐसे होने चाहिए जिनकी अहमियत लम्बे दौर में भी बनी रहे। जो भविष्य में भी उपयोगकर्ताओं के लिए संसाधन-सामग्री का काम दे सके। संसाधन पोर्टल पर ऑनलाइन भेजे जा सकते हैं – या फिर डाक या कूरियर के माध्यम से भेजे जा सकते हैं।

संसाधन तीन तरह से पोर्टल के लिए भेजे जा सकते हैं:

  1. संसाधन भेजें पर क्लिक करके पोर्टल पर डालें ( यह संसाधन भेजने का सबसे बेहतर तरीका है क्योंकि इससे समीक्षा की प्रक्रिया आसान रहेगी और आपका संसाधन पोर्टल पर शीघ्रता से आ पाएगा)।
  2. ई-मेल से teachers@azimpremjifoundation.org को भेजें। सम्पूर्ण सामग्री को ई-मेल के बक्से में लिखने या कट-पेस्‍ट करने की बजाय संलग्न फाइल के रूप में भेजें। अपनी सामग्री को माइक्रोसॉफ्ट वर्ड या ओपन ऑफिस राइटर जैसे सॉफ्टवेयर में टाइप कीजिए और फाइलों को संलग्न कीजिए। ई-मेल में अपना फोन नम्बर भी दे दें ताकि किसी आवश्यक स्पष्टीकरण के लिए आपसे सम्पर्क किया जा सके।
  3. डाक या कूरियर से सम्बद्ध भाषा के सम्पादक को भेजें, जैसे :

सम्पादक (हिन्दी), टीचर्स ऑफ इण्डिया
अज़ीम प्रेमजी फाउण्डेशन,
134 डोड्डाकन्नेल्ली, विप्रो कॉरपोरेट ऑफिस के बाजू में,
सरजापुर रोड, बंगलौर-5600035
दूरभाष: 080-66144900

अपना डाक का पता और फ़ोन नम्बर भी दें। प्रिन्ट-आउट या हाथ से लिखी, दोनों ही स्वीकार्य होंगे। सुनिश्चित करें कि सामग्री सुलेख में हो और डबल स्पेस में लिखित/टाइप हो। सभी हाशिए 1.5” के हों। कागज के एक ओर ही लिखा हो। कागज के दोनों ओर लिख रहे हों तो आगे की तरफ बाएँ हाथ पर और पीछे की तरफ दाएँ हाथ पर पर्याप्‍त हाशिया छोड़ें। सी.डी. भेज रहे हैं तो उस पर सामग्री का संक्षिप्त ब्यौरा भी लिखें। अपना नाम और सम्पर्क के लिए नम्बर भी दें।

उपयुक्त फाइल-नाम दें
ई-मेल के माध्यम से या सी.डी. पर फाइल भेजते समय फाइल का नाम ऐसा रखें जिससे उसकी विषयवस्तु को चिह्नित करना सरल हो। ई-मेल में उसका ‘विषय’ स्पष्ट लिखा होना चाहिए। सी.डी. पर भी फाइल का नाम और विषय स्‍पष्‍ट रूप से लिखें। साथ ही अपना नाम और फोन नम्बर भी सी.डी. पर लिखें। इससे आवश्यकता पड़ने पर आपसे सम्पर्क करने और संसाधन को अधिक शीघ्रता से अपलोड करने में सहायता मिलेगी।

उदाहरण:

हिन्दी-एम.पी.-रेंगने वाले प्राणी-लेसन प्लान-उदय
हिन्दी-यू.पी.-गणित-जोड़-वर्कशीट-सुनीति

कुछ और सुझाव: अपनी भाषा और राज्य का नाम भी दें। संसाधन का विषय और उसकी विषयवस्तु तथा उसकी किस्म के बारे में जानकारी स्‍पष्‍ट रूप से लिखें। साथ ही अपना नाम भी दें।

आवश्यक जानकारी को शामिल करें
प्रत्येक संसाधन पर कुछ मूलभूत जानकारी इस अर्थ में बहुत महत्वपूर्ण है कि इससे सम्पादकों को शीघ्रता तथा कार्यकुशलता से उसे देखने-समझने में मदद मिलेगी। कृपया अपने द्वारा भेजे जा रहे किसी भी संसाधन के प्रारम्भ में या फिर उसके साथ अलग से निम्नलिखित जानकारियाँ अवश्य दें:

भाषा जो संसाधन में प्रयोग की गई है।
विषय: जैसे - पर्यावरण अध्ययन, गणित, सामाजिक विज्ञान आदि।
विषयवस्तु: जैसे - जोड़, पौधों का जीवन, मौसम, व्यक्तिगत स्वच्छता आदि।
पाठ्यचर्या: उत्तर प्रदेश राज्य बोर्ड, हरियाणा राज्य बोर्ड आदि।
कक्षा स्तर जिसके लिए यह उपयुक्त है: (कक्षा 1-2; कक्षा 4-6; किसी भी कक्षा के लिए; कक्षा 8 आदि)।

अपना संक्षिप्त परिचय दीजिए: लेखक अपने अनुभव और दक्षता के क्षेत्र का लगभग 50 शब्दों का संक्षिप्त सा परिचय भी भेजें। पासपोर्ट साइज की अपनी तस्वीर भी भेजें-प्रिन्ट, ई-मेल या सी.डी. पर सॉफ्ट कॉपी में।

संसाधनों का रूप-रंग
जहाँ तक सम्‍भव हो कागज के एक ओर ही लिखिए/प्रिन्ट कीजिए।
सभी ओर – ऊपर, नीचे, दाएँ, बाएँ - 1.5” हाशिया छोड़िए।
डबल स्पेस में लिखें/टाइप करें।

फॉन्‍ट/ फॉरमैटिंग
पूरे दस्तावेज़ में एक ही फॉन्‍ट का प्रयोग करें। मुख्य शीर्षक आदि के लिए इटैलिक्स् या बोल्ड का प्रयोग करें।
भारतीय भाषाओं के लिए यूनिकोड फॉन्‍ट प्रयोग में लाएँ। प्रत्येक भाषा के लिए अपेक्षित फॉन्‍ट और उसके साइज के लिए नीचे दिया गया टेबल देखें:      

भाषा

फॉन्‍ट का नाम

मुख्य भाग

मुख्य शीर्षक

उपशीर्षक स्तर 1

उपशीर्षक

स्तर 2

हिन्दी

Mangal

12 प्वाइंट

20 प्वाइंट बोल्ड

14 प्वाइंट बोल्ड

12 प्वाइंट बोल्ड

भाषा और शैली
भाषा को सरल और स्पष्ट रखें ताकि एक आम पाठक भी उसे आसानी से समझ सके। वाक्‍यों  की संरचना में तार्किक प्रवाह भी हो।

शब्दों के संक्षिप्त रूप और शब्दों के प्रथम अक्षरों को मिला कर बने शब्द : किसी भी संसाधन में शब्दों के संक्षिप्त रूप को पहली बार प्रयोग में लाते समय उसके सम्पूर्ण रूप को लिखकर कोष्टक में उसका संक्षिप्त रूप दें। उसके बाद उस संसाधन में सब स्थानों पर उसका संक्षिप्त रूप दे सकते हैं।

उदाहरण: पाठ्यपुस्तक राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (रा.पा.रू.) 2005 के मानकों के मुताबिक तैयार की गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (रा.शि.नी.) की सिफारिश है कि राष्ट्र का शिक्षा ढाँचा रा.पा..रू. पर आधारित होगा। रा.पा.रू. 2005 सन् 1986 और 2000 के बाद से तीसरी रा.पा.रू. है......

तस्वीरें, चित्र  आदि
तस्वीरों, फोटो, चित्रों आदि जैसे ग्राफिक्स संसाधनों के महत्व को बढ़ा देते हैं। मगर यदि ग्राफिक्स बहुत ही कम रिज़ोल्यूशन के होंगे तो वे कागज पर प्रिन्ट होने पर बहुत ही धुँधले और अनाकर्षक दिखेंगे तथा बहुत उपयोगी नहीं होंगे। यदि रिज़ोल्यूशन बहुत अधिक होगा, तो फाइल का साइज बहुत अधिक होगा और ई-मेल से भेज पाना कठिन रहेगा। इसलिए रिज़ोल्यूशन का अनुकूल होना बहुत ही आवश्यक है - चित्र आदि अपलोड करने से पहले या दस्तावेज आदि में उन्हें डालने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है।

सुनिश्चित करें कि आपके ग्राफिक्स कम से कम 100 डी.पी.आई और अधिक से अधिक 200 डी.पी.आई रिज़ोल्यूशन के हों। 100 डी.पी.आई. से कम की तस्वीरें कम्प्यूटर की स्क्रीन पर तो शायद बहुत अच्छी लगें मगर कागज पर प्रिन्ट होने पर वे अच्छी गुणवत्ता की नहीं मिलेंगी (जब कि हमारे अधिकतर उपयोगकर्ता शायद उन्हें प्रिन्ट ही करवाना चाहेंगे)। इसलिए 100 डी.पी.आई. से अधिक रिज़ोल्यूशन वाले चित्र/तस्वीरें प्रयोग में लाने की कोशिश करें।

फाइल साइज को कम करना
फाइल साइज कम करने के लिए फोटो सम्पादन के विभिन्न सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जा सकता है, जैसे ‘Microsoft Office Picture Manager’ (जो माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस पैकेज का भाग है), ‘Picasa Photo Editor’ (जो मुफ्त डाउनलोड के लिए उपलब्ध है), ‘अडोब फोटोशॉप’ (जो व्यापारिक लाभ के लिए बेचा जाने वाला व्यावसायिक सॉफ्टवेयर है) या GIMP (जो फोटोशॉप का मुफ्त और खुले तौर पर उपलब्ध विकल्प है)। www.freeonlinephotoeditor.com जैसी वेबसाइट कोई सॉफ्टवेयर इन्स्टॉल किए बिना फोटो सम्पादित करने में मददगार होती हैं। यह इतना आसान है कि फोटो सम्पादन से अपरिचित लोग भी इसका आसानी से प्रयोग कर सकते हैं।

फाइल फॉरमैट
हम JPEG फॉरमैट को प्राथमिकता देते हैं।
चित्र/छवियाँ आदि jpeg, tiff, bmp, gif, png आदि जैसे कई रूपों में सहेजी जाती हैं। मगर tiff तथा bmp फॉरमैट की फाइलों का साइज बहुत अधिक होता है और आम प्रयोगकर्ता के लिए इनमें अन्य दिक्कतें भी पेश आती हैं। jpeg, gif तथा  png फाइलों का साइज़ कम होता है; jpeg तस्वीरें देखने और सम्पादन के लिए अधिकतर सॉफ़्ट्वेयर द्वारा समर्थित फॉरमैट है। इसलिए बेहतर होगा कि आप अपनी तस्वीरें, चित्र आदि को jpeg में परिवर्तित करें; विशेष तौर से तब जब वे tiff या bmp में हों।

ग्राफिक्स को अलग से संलग्न करें
जैसी कि बात हो ही चुकी है, चित्र आदि के जोड़ने से दस्तावेज की फाइल का साइज अधिक हो जाता है। इस लिए दस्तावेज में तस्वीरें तब ही जोड़ें जब निहायत जरूरी हो और वे उनका अन्तरंग हिस्सा हों। तस्वीरें जोड़ने से पहले सुनिश्चित कर लें कि उनका न्यूनतम रिज़ोल्यूशन 100 डी.पी.आई का हो, और यदि वह बहुत अधिक हो तो उसे 200 डी.पी.आई तक ले आएँ (देखें ऊपर, ‘फाइल साइज को कम करना’)।

यदि तस्वीरें प्रिन्ट की जानी हैं या उन्हें अलग से सहायक सामग्री के तौर पर इस्तेमाल होना है, तो तस्वीरें दस्तावेज में न जोड़ें, उन्हें अलग से संलग्न करें। हमें एक सी.डी. में ग्राफिक फाइल या ई-मेल से अलग संलग्नक के रूप में भेजें।

वीडियो
हम लम्बी फिल्मों की बजाए छोटे, संक्षिप्त वीडियो को प्राथमिकता देते हैं। हाँ, यदि आपके पास लम्बे वीडियो हैं जिनमें से छोटी, सार्थक क्लिपिंग ली जा सकती हैं, तो एक संक्षिप्त टिप्पणी के साथ हमें भेजें।
आप इन्हें तीन तरह से भेज सकते हैं। 1. पोर्टल पर अपलोड करें। 2. ई-मेल के रूप में भेजें। 3. सी.डी./डी.वी.डी. के रूप में डाक से भेजें। अधिक जानकारी ऊपर दी जा चुकी है।

आवश्यक नहीं है कि वीडियो किसी पेशेवर कैमरे से लिए गए हों। इस वेबसाइट पर मोबाइल कैमरे या डिजिटल स्टिल कैमरे से लिए गए दृश्य भी प्रकाशित किए जा सकते हैं। हाँ, वे उच्च शैक्षिक गुणवत्ता के होने चाहिए, और उनकी ऑडियो- विज़ुअल गुणवत्ता भी होनी चाहिए।

ऑडियो-विज़ुअल गुणवत्ता में सुधार के लिए कुछ बातें:

  1. चित्र लेते समय कैमरे को अत्यधिक स्थिरता से पकड़ें, उसे हिलने न दें। दृश्य खींचने के कोण बार-बार न बदलें। कैमरा स्टैण्ड का प्रयोग करें या फिर कैमरे को टेबल या ऐसे ही किसी समतल स्थान पर स्थिर कर के रखें।
  2. सुनिश्चित करें कि जिसका चित्र लिया जा रहा है, उस पर पर्याप्त रौशनी पड़ रही है।
  3. ध्यान रखें कि ऑडियो में किसी बाहरी शोर-शराबे से असर न पड़ रहा हो। माइक को ध्‍वनि के स्रोत के अधिक से अधिक नजदीक रखें।

वीडियो फॉरमैट
वीडियो को कई तरह से सहेजा जा सकता है – जैसे, mpeg, avi, flv, 3gp, wmv, mp4 आदि फॉरमैट में। हमारा पोर्टल इन सबके साथ सहज है, लेकिन हम flv, mp4 तथा mpeg को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि देखने के लिए इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर सबसे अधिक इन्हीं के अनुकूल हैं।

यदि आप को किन्हीं अन्य वेबसाइट पर हमारी वेबसाइट www.teachersofindia.org  के लिए प्रासंगिक और अनुकूल वीडियो मिलते हैं, तो उन्हें लिंक के रूप में हमें उपलब्ध करवा सकते हैं।

बौद्धिक ईमानदारी: कॉपीराइट, स्वीकृति/आभार
हम बौद्धिक ईमानदारी का आदर करते हैं। कृपया कुछ भी ऐसा हमें न भेजें जिसके अधिकार (कॉपीराइट) किसी अन्य व्यक्ति या संस्था के पास हैं। किसी भी स्रोत से उस मूल स्रोत की स्वीकृति या आभार के बिना किसी चीज की अनधिकृत नकल करना एक तरह की चोरी है – फिर चाहे वह आपके किसी साथी या शिष्य द्वारा लिए गए नोट्स से ही क्यों न लिया गया हो।

इन्टरनेट से लिए गए चित्र आदि भेजते समय सावधानी बरतें। इन्टरनेट पर उपलब्ध सब चित्र आदि नि:शुल्क नहीं होते। सुनिश्चित कर लें कि आप कॉपीराइट सुरक्षित चित्रों आदि का प्रयोग न कर रहे हों। ये कुछ ऐसी वेबसाइट हैं जिन पर चित्र आदि नि:शुल्क मिल जाते हैं: www.dreamstime.com/freeimages, http://www.gettyimages.com, http://www.flickr.com/, http://www.freeimages.co.uk/

आप जब भी किसी के किए काम से, किसी किताब, वेबसाइट आदि से कुछ उद्धृत करें तो उस के लिए उपयुक्त ढ़ंग से आभार व्यक्त करें। किसी अन्य के विचारों को आधार बना कर कुछ रचते हैं तब भी ऐसा करें। लेख के अन्त में प्रासंगिक सन्दर्भों और स्रोतों का क्रम से उल्लेख अवश्य करें। शक या अस्पष्टता की स्थिति में सम्पादक से सम्पर्क करें। 

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