हर बच्‍चे के लिए चार संक्रियाएँ

स्वाती सरकार

बुनियादी संख्यात्मक कौशल आज की दुनिया में बहुत ज़रूरी हैं। इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि कोई व्यक्ति कौन-सा कार्य करता है, रोज़मर्रा के जीवन में जोड़ना, घटाना, गुणा करना और भाग देने की क्षमता का होना सभी के लिए महत्त्वपूर्ण है। ज़ाहिर है कि यह संक्रियाएँ प्राथमिक स्तर के गणित के पाठ्यक्रम का एक मुख्य घटक हैं। लेकिन शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट — असर (ASER) सहित कई रिपोर्टों से पता चलता है कि हमारे बच्चे इन कौशलों को पर्याप्त रूप से सीख नहीं पा रहे हैं। इसके क्या कारण हो सकते हैं?

कारण 1 : संख्याएँ, स्वभाव से ही काफ़ी अमूर्त होती हैं। वे प्रत्यक्ष रूप से प्रकृति में मौजूद नहीं हैं। उदाहरण के लिए हम पाँच उँगलियाँ दिखा सकते हैं या पाँच बार ताली बजा सकते हैं या किसी चर्चा के पाँच बिन्दु गिन सकते हैं, लेकिन हम पाँच को दिखा नहीं सकते। 5 एक अंक है, एक प्रतीक है, जो पाँच का प्रतिनिधित्व करता है (और लिपि के अनुसार यह प्रतीक बदलते हैं)।

कारण 2 : बच्चों से बहुत छोटी उम्र में ही संख्याओं की इस अमूर्त अवधारणा को सीखने की अपेक्षा की जाती है जबकि उस उम्र में उनमें अमूर्त विचारों को समझने की क्षमता नहीं होती।

कारण 3 : जो शिक्षक बच्चों का परिचय संख्याओं की दुनिया से कराते हैं, उन्हें स्वयं संख्याओं के साथ सहज होना चाहिए।

कारण 4 : सम्भव है कि इन शिक्षकों को अपने विद्यार्थी जीवन में अच्छी गणित शिक्षा न मिली हो और हमारे देश की शिक्षक-शिक्षा प्रणाली ने भी इन्हें अपने विद्यार्थियों की मदद करने में सक्षम न किया हो।

परिणामस्वरूप हम दो मुख्य मुद्दे देखते हैं :

मुद्दा 1 : बच्चे इबारती सवालों को हल करने में असमर्थ हैं। कुछ हद तक इसका कारण ठीक से न पढ़ पाना और सवाल न समझ पाना हो सकता है। लेकिन कई बच्चे इबारती सवालों में दी गई स्थिति को गणितीय व्यंजकों में बदल पाने में असमर्थ होते हैं। उन्हें पता नहीं होता कि कब किस संक्रिया का उपयोग करना है और अकसर वह संकेत शब्दों (कीवर्ड) पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं।

मुद्दा 2 : बच्चे बहुअंकीय संख्याओं और मानक कलन गणित (एल्गोरिदम) से जुड़ी गणना में ग़लतियाँ करते हैं। घटाव के जिन सवालों में दो बार उधार लेना पड़ता है, जैसे कि 500 − 283, वे ज़्यादा कठिन होते हैं और वास्तविक जीवन में ऐसी स्थिति आती भी है, जैसे यदि आप 283 रुपए की कोई चीज़ ख़रीदते हैं और 500 रुपए का नोट देते हैं तो आपको कितने रुपए वापिस मिलेंगे। असर की रिपोर्ट और हमारे अवलोकन के अनुसार सभी शिक्षा बोर्डों के पाठ्यक्रम में सबसे अधिक समस्या भाग की संक्रिया में आती है। इसका मुख्य कारण स्थानीय मान की समझ न होना है। तो इसके लिए क्या किया जा सकता है?

इस लेख में हम तीन मुख्य चरणों पर ज़ोर देना चाहेंगे। अधिक विवरण के लिए पाठक सन्दर्भ सूची में दी गई स्रोत सामग्रियों को देख सकते हैं।

चरण 1 : अर्थ आधारित दृष्टिकोण

पहला, किसी भी संक्रिया को सिखाना शुरू करने से पहले, स्थानीय मान के बारे में बच्चों की समझ की जाँच करें, ख़ासकर यदि वे किसी दी गई मात्रा (जैसे, एक चम्मच चावल में दानों की संख्या) को संख्या नाम और अंक के साथ जोड़ने में सक्षम हों। स्थानीय मान का मूल विचार (या अब हम संख्या कैसे लिखते हैं) यह है कि जब भी हमारे पास दस हों तो उसका एक बण्डल बनाया जाए। तो, कोई भी संख्या ≥ दस, (i) कितने बण्डल हैं और (ii) बण्डल के बाहर कितने हैं यानी अबद्ध या खुले हुए हैं, उन अंकों का संयोजन है। इन बण्डलों को दहाई और खुले हुओं को इकाई कहा जाता है। जैसे ही हम दस बण्डलों तक पहुँचते हैं, तब हमें एक बड़ा बण्डल बनाना पड़ता है, और हम इसे सैकड़ा कहते हैं। इसी तरह जब हमें दस सैकड़े मिलते हैं तो हम और भी बड़े बण्डल बनाते हैं, जिसे हज़ार कहते हैं आदि।

इस बण्डलिंग की समझ बनाने के लिए और उसे लिखने के तरीक़े, जिसे स्थानीय मान कहा जाता है, को स्पष्ट करने के लिए ऐसी चीज़ें लेनी चाहिए जिनके बण्डल बच्चे बना सकें। इसके लिए तीलियाँ या झाड़ू की सींकें या टूथपिक्स और रबर बैंड बहुत अच्छे रहते हैं क्योंकि इन्हें जल्दी से बाँधा और खोला जा सकता है।

दूसरा, प्रत्येक संक्रिया का परिचय देने के लिए उपयुक्त स्थितियों और इबारती सवालों का उपयोग करने के साथ-साथ स्थिति को जीवन्त बनाने के लिए कुछ सामग्रियों को भी काम में लाएँ। इसके बाद तत्सम्बन्धी प्रतीकों यानी =, +, −, × और ÷ का परिचय दें और कुछ ऐसे अभ्यास कराएँ जो स्थितियों या इबारती सवालों को सम्बन्धित गणितीय व्यंजकों के साथ जोड़ते हैं। पहली कक्षा की एनसीईआरटी की गणित की पाठ्यपुस्तक में जोड़ और घटाव का और तीसरी कक्षा में गुणा और भाग का परिचय अच्छी तरह से दिया गया है।

तीसरा, बच्चों से दिए गए व्यंजकों जैसे कि 38 + 14, 72 − 55 आदि के लिए इबारती सवाल बनवाएँ। यह गतिविधि बच्चों को सृजनशील बनने में मदद करती है, उनकी भाषा के विकास को बढ़ावा देती है और उन्हें यह समझने में मदद करती है कि किन स्थितियों को किस संक्रिया द्वारा दर्शाया जा सकता है। यह गतिविधि व्यंजकों से स्थितियों तक जाकर चक्र (चित्र 1) को भी पूरा करती है। इसके अलावा, बच्चों के एक समूह द्वारा रचित इबारती सवालों को दूसरे समूह को हल करने के लिए दिया जा सकता है।

चित्र 1

चौथा, संक्रियाओं के बीच सम्बन्ध पर ज़ोर देने के लिए स्थिति को बदलें।

उदाहरण के लिए, इस स्थिति पर विचार करें : आपके पास 8 फूल हैं और मेरे पास 5 फूल हैं, तो हमारे पास कुल कितने फूल हैं? यह 8 + 5 =     से जुड़ता है, जो जोड़ का व्यंजक है। अब इसे थोड़ा बदल दें : आपके पास 8 फूल हैं और कुल मिलाकर हमारे पास 13 फूल हैं, तो फिर मेरे पास कितने फूल हैं? इसका उत्तर 8 +     = 13 है जो जोड़ का समीकरण है। रोल-प्ले के माध्यम से, दूसरा बच्चा इसके जैसा ही कोई और सवाल पूछ सकता है जिसका उत्तर 13 − 5 =     हो? तो हालाँकि ‘कुल मिलाकर’ का मतलब जोड़ होता है, पर यह एक व्यंजक (8 + 5) या एक समीकरण (8 +     = 13) हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप घटाना (13 − 8) पड़ता है। इससे बच्चों को स्थिति को पूरी तरह समझने में मदद मिलती है और संकेत शब्दों पर अधिक निर्भर नहीं होना पड़ता है।

इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह इस बात पर ज़ोर देता है कि कैसे हर जोड़ को दो घटावों के रूप में दर्शाया जा सकता है। गुणा और भाग का सम्बन्ध जोड़ने के लिए भी इसी तरीक़े को अपनाया जा सकता है।

 

चरण 2 : कलन गणित — कब, कैसे और क्यों

प्रत्येक संक्रिया शुरू करने के तुरन्त बाद मानक कलन विधि अपनाने की बजाय, बच्चों को सवाल को हल करने के विभिन्न तरीक़ों का पता लगाने दें। संख्याओं (<100) के जोड़ और घटाव के सवालों को हल करने के लिए संख्याओं के 10 × 10 बोर्ड के साथ-साथ गणितमाला की संख्या रेखा के प्रतिरूपण की सहायता ली जा सकती है। उदाहरण के लिए : 37 + 25 को इनमें से किसी भी तरीक़े से हल किया जा सकता है :

•  37 + 10 + 10 + 3 + 2 अर्थात 37 → 47 → 57 → 60 → 62

•  37 + 3 + 20 + 2 अर्थात 37 → 40 → 60 → 62

•  37 + 30 − 5 अर्थात 37 → 67 → 62

ध्यान दें कि यह मानक कलन विधि से बहुत अलग हैं जिसमें इकाई व दहाई को अलग-अलग करते हैं और दहाई को जोड़ने से पहले इकाई को जोड़ते हैं, अर्थात, 37 + 25 = (30 + 7) + (20 + 5) = (7 + 5) + (30 + 20) = 12 + (30 + 20) = 2 + (10 + 30 + 20) = 2 + 60 = 62

मानक कलन विधि की आवश्यकता तब पड़ती है जब हम दो से अधिक संख्याएँ जोड़ते हैं, उदाहरण के लिए किसी बिल का कुल जोड़ पता करते समय या जब हम बड़ी संख्याएँ (≥ 100) जोड़ते हैं।

उपयुक्त जोड़तोड़ (manipulative) की मदद से मानक कलन विधि बनाने में बच्चों की मदद करें। 100 से छोटी संख्याओं के साथ जोड़ और घटाव करने के लिए तीलियाँ और बण्डल काफ़ी अच्छे रहते हैं। जब बच्चे तीलियों और बण्डल के साथ काम करें तो उनसे कहिए कि वे प्रत्येक चरण को लिखें ताकि यह गतिविधि और प्रभावी हो सके।

2डी बेस-10 ब्लॉक, जिन्हें फ्लैट्स (सैकड़ा), लॉन्ग्स (दहाई) और यूनिट्स (इकाई) या FLU के रूप में जाना जाता है, वे 1000 से छोटी संख्याओं के साथ-साथ गुणा और भाग के लिए भी बहुत अच्छे रहते हैं। पाठक सन्दर्भ सूची (स.सू.) के 15वें लेख में इसके बारे में अधिक जानकारी पा सकते हैं।

यह भी महत्त्वपूर्ण है कि बच्चों को मानक कलन विधि के बारे में अपने सवालों के जवाब मिलें। उदाहरण के लिए, भाग संक्रिया बाईं ओर से क्यों शुरू होती है जबकि शेष तीनों संक्रियाएँ दाईं ओर से शुरू होती हैं? (स.सू. लेख 10)। बच्चों को यह पता लगाने देना चाहिए कि वे किस पद्धति को पसन्द करते हैं और क्यों। उदाहरण के लिए, 376 + 285 को संख्या रेखा पर दो तरह से हल किया जा सकता है, बाएँ से दाएँ अर्थात सैकड़े से शुरू करते हुए या दाएँ से बाएँ यानी इकाई से (चित्र 2) शुरू करते हुए। दाएँ से बाएँ ओर वाले तरीक़े में फिर से लिखना नहीं होता (मानक कलन विधि में), बाएँ से दाएँ ओर वाला तरीक़ा पहले चरण के बाद जोड़ का बेहतर अनुमान प्रदान करता है।

चरण 3 : अभ्यास

यह बात सही है कि अर्थ निर्माण महत्त्वपूर्ण है, लेकिन अभ्यास का कोई विकल्प नहीं है। किसी भी कौशल में महारत हासिल करने के लिए अभ्यास आवश्यक है। एक अंकीय संख्या के साथ जोड़ (और घटाव) के स्वचालनीकरण और एक अंकीय संख्या के गुणनफल के त्वरित स्मरण से संगणना में दक्षता प्राप्त करने में मदद मिलती है। टेन-फ़्रेम्स (स.सू.लेख 17) एक अंकीय संख्या के योग तथ्यों के स्वचालनीकरण में मदद करते हैं, विशेष रूप से संख्या ≥ 5 के लिए। इसी तरह से बच्चों को पहाड़ों का निर्माण करना चाहिए। साथ ही उन्हें यह भी सिखाना चाहिए कि 10 या 5 के पहाड़ों का उपयोग करते हुए उन गुणनफलों को कैसे याद करें जो 6, 7 और 8 के गुणन से प्राप्त हुए हैं। उदाहरण के लिए,

 

6 × 8 = 5 × 8 + 8 = 40 + 8 = 48

या 8 × 7 = 10 × 7 – 7 − 7 = 70 − 7 − 7 = 63 − 7 = 56

इससे बच्चे शुरुआत से ही पहाड़ों को फिर से देखे बिना गुणनफलों को खोजने में सक्षम होंगे। 9 के पहाड़े का निर्माण उक्त तरीक़े से किया जा सकता है और बच्चे इसमें विभिन्न पैटर्न का पता लगाते हैं। इसलिए 9 से जुड़े गुणनफलों को याद रखना आसान हो जाता है।

अभ्यास को कई तरीक़ों से रोचक बनाया जा सकता है। वॉल एक्टिविटी (स.सू. लेख 18) और रैंडम डिजिट गेम (स.सू. लेख 19) कुछ ऐसे ही विकल्प हैं। थिंकिंग स्किल पुलआउट (स.सू. लेख 12) अनेक प्रकार की खोज करने के अवसर देता है। इनसे अपने आप ही बहुत सारा अभ्यास होता है।

दो क्षेत्र ऐसे हैं जिन्हें प्रायः उपेक्षित किया जाता है, हम इस लेख को उन पर चर्चा के साथ समाप्त करना चाहेंगे :

(i) शून्य के साथ संक्रियाएँ; तथा,

(ii) इन संक्रियाओं के कुछ गुणधर्म

यह बात महत्त्वपूर्ण है कि बच्चे शून्य को केवल एक स्थान धारक नहीं बल्कि एक संख्या के रूप में मानें। इसे समझने का सबसे अच्छा तरीक़ा इस बात पर विचार करना है कि यह संख्या चारों संक्रियाओं में कैसे भाग लेती है। एनसीईआरटी और अन्य पाठ्यपुस्तकों में शून्य के साथ जोड़ और घटाव शामिल किए गए हैं। पर शून्य के साथ गुणा को अकसर नज़रअन्दाज़ कर दिया जाता है। इससे यह ग़लत धारणा बनती है कि गुणनफल हमेशा उन पूर्ण संख्याओं से बड़ा होता है जिन्हें गुणा किया गया था। शून्य के साथ भाग की समझ तो और भी कम है। 0 ÷ 4 को तो फिर भी समझाया जा सकता है, लेकिन शून्य से भाग को अधिक बारीकी से जाँचने की आवश्यकता है। 6 ÷ 0 =     पर विचार करें। इसे गुणा के समीकरण के रूप में लिखा जा सकता है अर्थात     × 0 = 6। स्पष्ट है कि कोई भी संख्या इस रिक्त स्थान को नहीं भर सकती। दूसरी ओर, 0 ÷ 0 =     पर     × 0 = 0 के समीकरण के रूप में विचार करें। अब, हम जितनी संख्याएँ जानते हैं, वे सभी यहाँ आ सकती हैं! हम इतनी सारी संख्याओं में से एक संख्या कैसे चुन सकते हैं? इसलिए, अब स्थिति 0 ÷ 4 के बिल्कुल विपरीत है!! इसलिए, शून्य द्वारा किसी भी संख्या, चाहे वह शून्य हो या ग़ैर-शून्य, का विभाजन अपरिभाषित है।

जोड़ और गुणा के क्रमविनिमय, साहचर्य और वितरण गुणधर्म आमतौर पर इस स्तर पर छिप जाते हैं। लेकिन वे मानक कलन विधि के लिए महत्त्वपूर्ण हैं और उन्हें बच्चों को अनुकूल तरीक़े से सिखाया जा सकता है। दो अंकीय संख्याओं का दहाई और इकाई में विभाजन और मानक जोड़ कलन विधि के लिए संयोजन (ऊपर दिया गया उदाहरण 37 + 25 देखें) में इस संक्रिया के क्रमविनिमय और साहचर्य गुणधर्मों के कई अनुप्रयोग शामिल हैं। दूसरी ओर बहुअंकीय गुणा में सीधे साहचर्य और वितरण गुणधर्मों का उपयोग किया जाता है।

4 × 30 = 4 × (3 × 10) = (4 × 3) × 10 = 12 × 10 = 120 : इस प्रकार हम इस तरह के गुणनफलों का पता लगाने के बारे में बताते हुए गुणा के साहचर्य गुणधर्म का उपयोग करते हैं। इसके अलावा अगर बच्चों से यह पता लगाने के लिए कहा जाए कि क्या यह गुणधर्म घटाव और भाग के लिए हैं तो अच्छा होगा। वितरण का गुणधर्म (40 − 12) ÷ 4 जैसे उदाहरणों पर लागू होता है (क्यों?)।

बच्चों द्वारा चार बुनियादी संक्रियाओं में महारत हासिल करने से सम्बन्धित मुद्दों के बारे में हम जानते हैं और दुर्भाग्य की बात है कि यह मुद्दे लगातार बने हुए हैं। लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए क्योंकि हम इनके समाधान भी काफ़ी लम्बे समय से जानते हैं। सेवापूर्व और सेवाकालीन शिक्षक-शिक्षा जैसी बड़ी प्रणाली को बदलने के लिए बहुत सारा समय और प्रयास लगता है, हम आशा करते हैं कि यह लेख इच्छुक और जिज्ञासु शिक्षकों को कुछ हटकर करने के लिए दिशानिर्देश पाने में मदद कर सकता है। इसके लिए नीचे दी गई स्रोत सामग्रियों से जानकारी प्राप्त करने और शैक्षणिक विधियों को संशोधित करने की आवश्यकता होगी। लेकिन हम आश्वस्त कर सकते हैं कि यह प्रयास अन्ततः बहुत लाभदायी होगा जैसा कि देश भर के कई शिक्षकों ने अनुभव किया है।

सन्दर्भ सूची

  1. ASER: http://www.asercentre.org//p/359.html
  2. Math-Magic, Class 1-3, NCERT: http://ncert.nic.in/textbook/textbook.htm
  3. Ganit Bodh, Digantar: http://www.digantar.org/uploads/pdf/publications.pdf
  4. Place Value: http://www.teachersofindia.org/en/article/atria-pull-out-place-value
  5. Addition: http://teachersofindia.org/en/article/atria-pullout-section-july-2013
  6. Subtraction: http://teachersofindia.org/en/article/pullout-section-november-2013-teaching-subtraction
  7. Multiplication: http://teachersofindia.org/en/article/pullout-section-march-2014-teaching-multiplication
  8. http://teachersofindia.org/en/presentation/initiating-multiplication
  9. Division: http://www.teachersofindia.org/en/article/pullout-section-july-2014-division
  10. http://teachersofindia.org/en/ebook/thoughts-division-operation
  11. Word problems: http://teachersofindia.org/en/article/word-problems-mathematics
  12. Thinking Skills: http://teachersofindia.org/en/ebook/thinking-skills-pullout
  13. Addition properties: http://azimpremjiuniversity.edu.in/SitePages/resources-ara-vol-7-no-2-july-2018-exploring-properties-of-addition.aspx
  14. Ganitmala: http://teachersofindia.org/en/article/making-ganitmala
  15. Flats-longs-units: http://teachersofindia.org/en/article/making-multiple-versions-flats-longs-units-teach-numbers-and-their-operations
  16. Arrow cards: http://teachersofindia.org/en/article/making-your-own-arrow-cards
  17. Ten-frames: http://teachersofindia.org/en/article/using-ten-frames-inside-your-classroom
  18. Wall: http://teachersofindia.org/en/activity/brick-wall-math-game
  19. Random digits: http://teachersofindia.org/en/activity/number-game-random-digits

स्वाती सरकार स्कूल ऑफ़ कंटीन्यूइंग एजुकेशन एण्ड यूनिवर्सिटी रिसोर्स सेंटर, अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक हैं। गणित उनके जीवन का दूसरा प्यार है (पहला प्यार ड्राइंग है)। उन्होंने भारतीय सांख्यिकीय संस्थान से बीस्टैट-एमस्टैट और वाशिंगटन विश्वविद्यालय, सिएटल से गणित में एमएस किया है। वे पाँच वर्षों से अधिक समय से बच्चों और शिक्षकों के साथ गणित सम्बन्धी कार्य कर रही हैं और सभी तरह की व्यावहारिक व क्रियाशील गतिविधियों, विशेष रूप से ओरिगेमी, में गहरी दिलचस्पी रखती हैं। उनसे swati.sircar@apu.edu.in पर सम्पर्क किया जा सकता है।

Hindi translation of the article Four Operations for Every Child  : Swati Sircar published in Azim Premji University Learning Curve, April 2020

अनुवाद : नलिनी रावल     कॉपी-सम्पादन : कविता तिवारी     सम्पादन : राजेश उत्साही 

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