शिक्षक दिवस ऐसे भी मनाया जा सकता है...

मौजूदा दौर में भले ही शिक्षा व्यवस्था को लेकर चारो ओर बहस चलती नजर आ रही हो, शिक्षकों की पेशेवर क्षमता को लेकर भी सवाल उठ रहे हों, परन्तु हमें यह भी समझना होगा कि नए समाज को गढ़ने में शिक्षक की भूमिका व उसके योगदान को नजर अन्दाज नहीं किया जा सकता। तमाम व्यवस्थागत व अकादमिक चुनौतियों से जूझते हुए आज का शिक्षक अपने शिक्षक होने की पहचान को खोजता हुआ नजर आता है। ऐसे अवसर बहुत कम ही देखने को मिलते हैं जब शिक्षक साथी अपने शिक्षक होने का गौरव महसूस करते हुए अपनी चुनौतियों, प्रयासों व अपनी बातों को खुलकर रख पाते हों।

अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन मगरलोड विकासखण्ड गतिविधि केन्द्र की ओर से शिक्षक दिवस को मनाने की तैयारी चल रही थी। ब्लॉक टीम के साथियों की आपसी बातचीत के बाद हम इस नतीजे पर तो पहुँचे कि इस दिन कोई ऐसा औपचारिक कार्यक्रम नहीं करेंगे,  जिसमें शिक्षक सम्मानित किए जाएँ या कोई वक्ता उन्हें सम्बोधित करे। सवाल यह था कि फिर क्‍या करेंगे?  कई विचार आए। कई सुझाव समूह ने आपस में साझा किए। अन्त में यह तय हुआ कि हम शिक्षकों के साथ मिलकर एक अनौपचारिक कार्यक्रम करेंगें। कार्यक्रम का उद्देश्य होगा शिक्षक दिवस को साथ मिलकर मनाना व एक-दूसरे को बधाई देते हुए शिक्षक साथियों के साथ हमारे रिश्तों में और मजबूती लाना।

कार्यक्रम को लेकर हमारे अपने भीतर स्पष्टता थी।  हम चाहते थे कि इस अलग तरह के आयोजन के आयोजक हम अकेले न हों बल्कि ब्लॉक के शिक्षक भी इस कार्यक्रम के आयोजन में साथ जुड़ें। वे स्वयं आयोजक व संचालक की भूमिका में नजर आएँ। अपने इन विचारों को शिक्षक साथियों के साथ साझा करने को व सुझावों को जानने हेतु एक तैयारी बैठक आयोजित की। बैठक का समय स्कूल की छुट्टी के बाद तय किया। साठ शिक्षक आमंत्रित किए गए किन्‍तु बैठक में मात्र पाँच ही शामिल हुए। पर उनसे अच्छी बातचीत हुई।

पहले यह कार्यक्रम को शिक्षक दिवस को ही करना चाह रहे थे। किन्तु प्रधानमन्त्री  का सम्बोधन कार्यक्रम तय होने के कारण इसे 5 सितम्बर के बजाय 6 सितम्बर को करना तय किया।

लेकिन शिक्षक दिवस को हम खाली नहीं छोड़ना चाह रहे थे। यह तय हुआ कि हम शिक्षक दिवस के दिन बधाई पत्र के साथ उनके स्कूल पहुँचेंगे और उन्हें व्यक्तिगत तौर पर बधाई देंगे। अगले दिन की बैठक के लिए आमन्त्रित करेंगे।

शिक्षक साथियों के साथ हुई बातचीत में कार्यक्रम की एक रूपरेखा तैयार हो गई। सकारात्मक बात यह थी कि उन्होंने प्रभावी ढंग से बेहिचक अपनी बातों को रखा और उनके सुझावों से ही कार्यक्रम की तारीख समय व रूपरेखा तैयार हुई।

तय हुआ कि शिक्षकों को एक बधाई संदेश एक पत्र के माध्यम से दिया जाए। पत्र का प्रारूप क्या हो? किस तरह का संदेश लिखा जाए, इन सभी पहलुओं पर गौर करते हुए यह सुझाव आया कि बधाई पत्र में मुख्य पृष्ठ पर एक चित्र हो, अगले पन्ने पर अब्राहम लिंकन का अपने बेटे के शिक्षक को लिखा गया पत्र हो और दूसरे पन्ने पर शिक्षकों को सरल भाषा में शुभकामना संदेश हो।

अब्राहम लिंकन के पत्र का चयन करते हुए एक साथी ने ध्यान आकर्षित किया कि इसमें बेटे शब्द का उल्लेख किया गया है जबकि शिक्षक के लिए बेटे और बेटी दोनों को एक समान अवसर प्रदान करने जैसा कुछ सन्‍देश होना चहिए। हम कशमकश में पड़ गए, पत्र में लिखे गए किसी भी वाक्य या शब्द में तो कोई बदलाव नहीं किया जा सकता था। ऐसी स्थिति में हमारे एक साथी जो बंगलौर से आए हुए थे और जिन्हें सम्पादन का लम्बा अनुभव था उन्होंने कलम उठाई और सम्बन्धित वाक्य पर स्टार का चिन्ह लगाते हुए पत्र के नीचे लिख दिया ‘और बेटियों के लिए भी’।  अब यह एकदम उपयुक्त था।

पत्र के मुखपृष्ठ का चित्र हमारी एक साथी ने ही तैयार किया और दूसरे साथी ने सभी सामग्री को इकट्ठा करते हुए बधाई पत्र का डिज़ाइन तैयार किया। कुछ घंटों की मेहनत के बाद एक खूबसूरत कार्डनुमा बधाई पत्र हमारे सामने तैयार था। इस कार्ड संस्थान के प्रिंटर से रंगीन कागज पर इस कार्ड के प्रिंट निकाले गए। हम इसके मार्फत यह भी संदेश पहुँचाना चाह रहे थे कि सीमित संसाधनों में भी बेहतर विकल्प तैयार किए जा सकते हैं।

टीम ने तय किया कि हम सब शिक्षक दिवस के दिन शिक्षकों तक बधाई पत्र के साथ पहुँचेंगे और उन्हें प्रत्यक्ष रूप से शुभकामना देंगे।

टीम के 6 साथी तीन मोटर साइकिलों पर निकल पड़े। चूँकि एक दिन में पूरे ब्लॉक के शिक्षकों तक पहुँचना असम्भव था। हमने चयनित तीन संकुलों के शिक्षकों तक पहुँचने का निश्चय किया।

हल्की बारिश के बीच कच्चे-पक्के रास्तों से गुजरते हुए हम स्कूल दर स्कूल रूक कर शिक्षकों से मिलते हुए, बधाई पत्र के साथ शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ दे रहे थे। यद्यपि शिक्षक साथी प्रधानमन्त्री के कार्यक्रम की तैयारी में लगे हुए थे परन्तु हमारे हाथों बधाई पत्र लेते हुए उनके चेहरे की मुस्कान हमें नई ऊर्जा दे रही थी। यकीनन इस तरह उनसे मिलना हमारे और उनके बीच रिश्तों को और मजबूती दे रहा था, यह अन्दाजा हम शिक्षक साथियों की प्रतिक्रियाओं व उनकी खुशी को देखकर लगा रहे थे।

''आमतौर पर बच्चे ही हमें शिक्षक दिवस की बधाई देते हैं या हम आपस में एक दूसरे को बधाई देते हैं यह पहला मौका है जब किसी ने हमें स्कूल में आकर बधाई दी हो। बहुत अच्छा लगा आप सबका यह प्रयास देखकर, आपको भी बधाई। इस दिन शिक्षकों को सम्मानित करने के तो कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं किन्तु हमारे प्रयासों को सम्मान देने कोई हमारे स्कूल तक आए, ऐसा पहली बार हुआ है। आप साथियों को बहुत बहुत धन्यवाद।’’

एक शिक्षक द्वारा कहे गए इन वाक्यों ने हमें अहसास दिलाया कि हमारे प्रयास ने इन्हें खुशी दी है और हमारे व शिक्षकों बीच की रिश्ते की डोर आज और मजबूत हुई है।

दिन भर में हम सब साथियों ने लगभग 170 शिक्षकों व समुदाय के 35 लोगों को बधाई पत्र दिया और उनसे व्यक्तिगत मुलाकात की। शिक्षकों के साथ-साथ स्कूल में मौजूद समुदाय के साथियों को भी हमने शुभकामना देते हुए बधाई पत्र दिया और अगले दिन की अनौपचरिक बातचीत का आमन्त्रण दिया। सही मायनों में हमारी ओर से शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में मुख्य कार्यक्रम यही था, शिक्षकों से मिलना।


अब्‍दुल कलाम, स्रोत व्‍यक्ति,अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन विकासखण्‍ड गतिविधि केन्‍द्र, मगरलोड,धमतरी,छत्‍तीसगढ़ द्वारा भेजी गई रपट का सम्‍पादित अंश।

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