भाषा की कक्षा में कविता शिक्षण

कक्षा शिक्षण योजना , कविता – कक्कू   NCERT  कक्षा -03 

भाषा कक्षा शिक्षण में भाषा शिक्षण के उद्देश्यों को देखते हुए कक्षा शिक्षण योजना के महत्व को नकारा  नहीं जा सकता। चूँकि परम्‍परागत रूप से भाषा शिक्षण का तात्पर्य केवल बच्चों को भाषा की पुस्तक पढ़ाने व उसके अभ्यास कार्य हल करने तक ही सीमित मान लिया जाता है। जबकि भाषा शिक्षण अपने भीतर अनेकों साहित्यिक विधाओं को संजोए हुए है जिसका ज्ञान भाषा की कक्षा में कराना आवश्यक है। जिनमें से एक विधा कविता भी है। कविता को कक्षा में किस प्रकार पढ़ाया जाए ? इसको लेकर शिक्षाविदों का मानना है कि पढ़ने की कुंजी अनुमान लगाने का कौशल है। इस कौशल के विकास में कविता आश्चर्यजनक योगदान कर सकती है। नियमित रूप से कविताएँ सुनकर छोटे बच्चे भाषा की बुनियादी संरचनाएं ग्रहण कर लेते हैं। कविता इसके लिए विशेष रूप से उपयोगी इसलिए है क्योंकि उसे याद रखना आसान होता है। कविता याद रखने को छोटे बच्चों को कोई विशेष प्रयास नहीं करना पड़ता। बार-बार सुनने,मजा लेने और दुहराने से कविता अपने आप याद हो जाती है।( सन्दर्भ : बच्चे की भाषा और अध्यापक – प्रो.कृष्ण कुमार )                           

चूँकि शिक्षण योजना बनाते समय इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि शिक्षण योजना क्या पढ़ाने के लिए बनाई जा रही है ? शिक्षण योजना किस आयु वर्ग ,कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए बनाई जा रही है ? कक्षा में पढाना कैसे है ? तथा पढ़ाये का आकलन कैसे करेंगे ? यह सभी बिन्‍दु किसी भी विषय से सम्बंधित शिक्षण योजना के महत्वपूर्ण घटक हैं।  ( सन्दर्भ : जय शंकर चौबे से बातचीत पर आधारित)             

कविता शिक्षण के उद्देश्य : कविता भी साहित्य की विधाओं में से ही एक विधा है। अतः भाषा शिक्षण के उद्देश्यों तथा कविता शिक्षण के उद्देश्यों को अलग–अलग नहीं देखा जा सकता। इसके बाद भी कविता शिक्षण के कक्षानुसार कुछ विशिष्ट उद्देश्य निम्नलिखित हैं -

  • कविता की लय,ताल और तुक का आनन्‍द उठा पाना
  • कविता की संरचना को समझना
  • कल्पनाशीलता को बढ़ाना
  • अन्य कविताएँ पढ़ने के लिए प्रेरित करना आदि

प्रक्रिया -  

  • सर्वप्रथम कक्षा में जाकर बच्चों से सामान्य बातचीत के बाद बात करेंगे कि आपने पिछली कक्षाओं में तथा विद्यालय के पुस्तकालय से कविताएँ तो पढ़ी ही होंगी ? यदि हाँ तो कौन –कौन सी कविताएँ आपने पढ़ी हैं ? कुछ बच्चों के जवाब आने के बाद बातचीत करेंगे कि मैं आपको एक कविता सुनना चाहता/चाहती हूँ क्या इसके लिए हम मिलकर गोलाई में बैठ सकते है ? बच्चों की सहमति के बाद कक्षा में बच्चों के साथ गोल घेरे में बैठेंगे ताकि सभी एक दूसरे को आमने –सामने देख पाएँ।
  • इसके बाद बच्चों के साथ हाव-भाव सहित कक्कू कविता को गायेंगे। कविता पूरी होने के बाद बच्चों से बातचीत करेंगे कि बच्चों को कविता कैसी लगी ? यदि किसी को कविता अच्छी लगी तो क्यों अच्छी लगी ? तथा अच्छी नहीं लगी तो क्यों अच्छी नहीं लगी ? तथा कविता में उनको कहाँ–कहाँ पर मजा आया ? और क्यों ? इसके बाद बच्चों से जानेंगे कि कविता में क्या हो रहा है ? जिसमें विद्यार्थी एक-एक करके सोचकर तथा तर्क के अनुसार अपने विचारों को अभिव्यक्त कर रहे होंगे। क्योंकि केवल रट लेने के स्थान पर बच्चों को सोचना,तर्क करना,अनुमान लगाने के अवसर देना भाषा शिक्षण के उद्देश्यों में समाहित है।
  • इसके बाद विद्यार्थियों से बातचीत की जाएगी कि आप में से कोई भी साथी इस कविता को हाव – भाव के साथ कराए या किताब से गाकर भी सुना सकते हैं। जिसमें कुछ बच्चों से हाव-भाव के साथ यह कविता सुनी जाएगी। इसके बाद बच्चों के साथ निम्नलिखित पक्षों पर चर्चा व लेखन कार्य किया जाएगा  –
  1. कविता में आये शब्दों पर बातचीत : कविता में आए कठिन शब्दों को बोर्ड पर लिखा जाएगा तथा उनके क्या मतलब होते हैं ? उन पर चर्चा की जाएगी जैसे –सक्कू,कक्कू,ठिठोली,भक्कू,झगड़ालू आदि। जिसमें बच्चे अपनी–अपनी समझ के अनुसार अपनी बात को रख रहे होंगे। जो कि उनकी अभिव्यक्ति की क्षमता को मजबूत करता है।
  2. कविता में दिए गए अभ्यास पर चर्चा : कविता में दिए गए अभ्यास के महत्त्व को देखते हुए उस पर बातचीत की जाएगी कि –जैसे कविता में कक्कू का मतलब कोयल बताया गया है और कोयल का मतलब मिश्री तो क्या आपके नाम का भी कुछ मतलब होगा यदि हाँ तो क्या ? इसके बाद बातचीत की जाएगी कि तुमको घर में प्यार से किस नाम से बुलाते हैं ? और चिड़ाते किस नाम से हैं ? जब आपको इस तरह के नामों से चिढ़ाया जाता है तो आपको कैसा लगता है ? इस प्रश्न से आये जवाबों को लेकर कक्षा में संवेदनशीलता के मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है ।
  3. तुम्हारे दोस्त तुमको किस नाम से बुलाते हैं ? और क्यों ? बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहा जाएगा कि किसी–किसी बच्चे को भोली ,छुटकी ,गोलू नामों से क्यों बुलाया जाता होगा ?  इसके बाद बातचीत की जाएगी कि यदि आपको इस कविता के बारे में और कुछ जानना हो तो आप क्या–क्या प्रश्न पूछोगे ? जिसमें बच्चे प्रश्न बनाने का प्रयास कर रहे होंगे। सामान्यतः स्कूली शिक्षा में बच्चों को जवाब देने के अवसर ही होते हैं। बच्चों को प्रश्न करने के न तो समाज में ज्यादा अवसर हैं न ही विद्यालय में जिसके कारण आगे चलकर बच्चे समाज की कुरीतियों पर भी सवाल नहीं उठा पाते। अतः कक्षा में प्रश्न पूछना सिखाने की प्रक्रिया उनको जागरूक नागरिक बनाने में काफी मददगार होती है।
  4. कविता का शीर्षक पर बातचीत : अभी हमने जो कविता गायी उसका नाम कक्कू है। तो क्या इस कविता का नाम कुछ और भी रखा जा सकता है ? यदि हाँ तो क्या–क्या  नाम रखा जा सकता है ? और क्यों ? जिसमें बच्चे अपनी-अपनी समझ के अनुसार नाम सुझा रहे होंगे तथा उसका तर्क भी बता रहे होंगे।
  5. स्थानीय कविताओं पर बातचीत : कविता के शीर्षक पर बातचीत करने के बाद बच्चों से उनके द्वारा खेल–खेल में गाई जाने वाली कविताओं को सुना जाएगा। जैसे अक्कड़–बक्कड़ ........आदि। ताकि विद्यार्थी कविताओं को स्थानीय वरिवेश के परिपेक्ष में देख पाएँ। और उनसे जुड़ पाएँ।
  6. नयी कविता बनाने पर बातचीत : इसके बाद बच्चों से बातचीत की जाएगी कि वह भी अपने मन से कोई कविता बनाएँ तथा उसका कोई नाम भी रखें तथा जो विद्यार्थी अभी लिख नहीं पाते हैं वो कविता का चित्र बनाएँगे। अन्‍त में बच्चों द्वारा किये गए इस पूरे कार्य का अवलोकन किया जाएगा। ताकि आगामी योजना बनाने में मदद मिले।                                                                       
  • आकलन : आकलन कक्षा के शिक्षण कार्य के दौरान ही हो रहा होगा। जो कि सीखे का आकलन न होकर सीखने के लिए आकलन हो रहा होगा। जिसमें बच्चों को कविता अच्छी क्यों लगी ? जैसे सवाल उनको सोचने और तर्क करने का अवसर दे रहे होंगे तथा नयी कविता बनाना तथा चित्र बनाना व कविता की खाली पंक्तियों को भरवाना जैसे कार्य उनमे रचनात्मकता व कल्पनाशीलता का विकास करेंगे। वही कविता को लय,ताल व तुक में गाना बच्चों को आनन्‍द के साथ कविता की संरचना को समझने में मदद कर रहे होंगे तथा नई कविताओं को पढ़ने की रूचि भी पैदा करेंगे।

प्रस्‍तुति : दिव्‍य प्रकाश जोशी, अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन ।

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