कविता शिक्षण के उद्देश्य

कविता साहित्य की एक विधा है। कविता कवि की सौन्दर्यानुभूति की अभिव्यक्ति है, कवि की व्यथा की अनुभूति है, कवि की आकांक्षाओं- अपेक्षाओं की अभिव्यक्ति है। कविता लिखते समय जिस भाव के साथ लिखी जाती है, यदि पढ़ने वाला भी उसे उसी अर्थ और भाव के साथ उसे समझ सके तो कविता लिखने का उद्देश्य सार्थक हो जाता है।

कविता का शिक्षण भाषा की कक्षाओं का अपरिहार्य अंग है। हरेक कक्षा की पाठ्यपुस्तक में हमें कई कविताएँ पाठ्यक्रम में शामिल की हुई नजर आ जाती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि कविता केवल साहित्य, कला और सौन्दर्य का विषय नहीं है वरन भाषा सीखने में भी इसका खासा महत्व है।

कविता में लय है, ताल है, आनन्‍दमय दोहराव है शब्दों का जो सभी को सहज ही आकर्षित करता है। प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों की बात करें तो वे भी कविता की लय और ताल में आनन्‍द महसूस करते हैं और यह आनन्‍द उन्हें कविता से जोड़ता है। कविता में बार-बार आने वाले ध्वन्यात्मक शब्द बच्चों को मजेदार लगते हैं। ऐसे में उनके लिए कविताएँ भाषा शिक्षण का एक आसान और रुचिकर तरीका बन सकती हैं। इसके लिए ऐसी कविताएँ चुनना जो उनके लिए मजेदार हों, उनके कल्पना संसार से मेल खाती हो और उन्हें समझने में आसान हो, आवश्यक है।

इन कक्षाओं में कविता के शिक्षण के उद्देश्‍य इस प्रकार हो सकते हैं-

  • कविता की लय,ताल और तुक का आनन्‍द उठा पाना
  • कविता की संरचना को समझना
  • कल्पनाशीलता को बढ़ाना
  • अन्य कविताएँ पढ़ने के लिए प्रेरित करना

माध्यमिक कक्षाओं तक आते-आते बच्चे लिखित सामग्री का अर्थ ग्रहण करना भलीभाँति सीख जाते हैं। बिटवीन द लाइन पढ़ना यानी कविता के छिपे अर्थ या लक्षणा तथा व्यंजना को समझ पाना उनके लिए सहज हो जाता है। ऐसे में उन्हें कुछ गम्‍भीर और सार्थक कविताएँ पढ़ने के लिए दी जानी चाहिए जो भाषा के विविध सौन्दर्य के साथ-साथ सामाजिक विषमताओं तथा सामाजिक मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करती हों।

माध्यमिक कक्षाओं में कविता शिक्षण के उद्देश्य इस प्रकार हो सकते हैं-

  • स्वयं पढ़कर कविता के मुख्य भाव/ अर्थ को समझना
  • कविता से एक विधा के रूप में परिचित होना और उसकी खासियतें जानना-शब्दावली और संरचना से परिचित होना
  • कविता की लय और ताल का आनन्‍द उठा पाना
  • कविता में निहित भाव को अपने परिवेश से जोड़ कर देख पाना
  • कल्पनाशीलता को बढ़ाना
  • अन्य कविताएँ पढ़ने के लिए प्रेरित करना
  • स्वयं कविता लिखने के लिए प्रेरित होना

कक्षा प्रक्रियाएँ

शिक्षक होने के नाते हमें यह ध्यान रखना होगा कि यदि हमारी कक्षाओं में कविता उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पढ़ाई जा रही है तो हमारी कक्षा प्रक्रियाएँ इस तरह की होनी चाहिए जो इन उद्देश्यों तक पहुँचने में हमारी मदद करती हो। जैसे - यदि हमारा एक उद्देश्य स्वयं कविता पढ़कर मुख्य भाव ग्रहण करना है तो कक्षा में वैसे अवसर उपलब्ध कराने होंगे। इसके लिए शिक्षक एक बार कविता का सस्वर वाचन करके दूसरी बार में बच्चों को कविता का मौन वाचन करने के लिए कह सकते हैं। एक बार मौन वाचन के बाद कविता किस विषय पर लिखी गई है, किस सन्दर्भ की बात करती है जैसे प्रश्नों द्वारा कविता के ग्लोबल मीनिंग या समग्र अर्थ पर बात हो सकती है। इसके बाद कविता के छोटे-छोटे अंशों को पढ़कर उन पर बात की जा सकती है। इस प्रक्रिया में शिक्षक अपनी ओर से कोई बना-बनाया अर्थ बच्चों को नहीं दे रहे हैं जिसे रटने की आवश्यकता पड़े। इस प्रक्रिया में बच्चे स्वयं ही अर्थ तक पहुँचने की कवायद कर रहे हैं जो उनके लिए चुनौतीपूर्ण, मजेदार और सार्थक है। अब चूँकि स्वयं अर्थ निकाला जा रहा है अतः इसे रटने की आवश्यकता रह ही नहीं जाएगी। 

यदि कविता शिक्षण के पीछे हमारा एक उद्देश्य कल्पनाशीलता को बढ़ाना है तो कविता की नई पंक्तियाँ बनाना, कुछ शब्द चुनकर उनकी सहायता से कविता लिखना, कविता में नए बिम्‍ब किस तरह उपयोग में लाए जा सकते हैं इन पर बातचीत करना आदि बातें कक्षा में हो रही होंगी। इसके लिए कक्षा में नियत कविता पढ़ाने के बाद उसी कविता की पंक्तियों को आगे बढ़ाना, शिक्षिका द्वारा दिए गए कुछ शब्दों के प्रयोग से कविता की नई पंक्तियाँ रचना, बिम्‍ब विधान पर बातचीत करना और किसी विषय वस्तु के लिए किस तरह के बिम्‍ब हो सकते हैं इस पर बातचीत भी कक्षा प्रक्रिया का हिस्सा होगी।

इसी तरह यदि हमारा उद्देश्य बच्चों को कविता की संरचना से परिचित कराना है तो  हमें बच्चों को अलग-अलग तरह की कविताएँ पढ़ने के लिए देनी होंगी जिनमें कुछ तुकान्‍त हो, कुछ गेय हो, कुछ अतुकान्‍त हो ताकि वे उनमें अन्‍तर पहचान सकें और उनकी संरचना को समझ सकें। इन कविताओं पर बातचीत के बाद उन्हें इस तरह की कुछ कविताएँ समूह में रचने के लिए भी कहा जा सकता है।

संक्षेप में यही कि साहित्य की विधा के रूप में कविता का रसास्वादन करना, उस पर अपनी राय दे पाना, स्वयं कविता रच पाना और विविध साहित्य पढ़ने में रुचि उत्पन्न करना भी भाषा शिक्षण का प्रमुख उद्देश्य है। अतः इसके लिए कक्षा में इस तरह के अवसर प्रदान करने के लिए विद्यमान प्रक्रियाओं में बदलाव किए जाने अपरिहार्य होंगे।


भारती पंडित ,अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन, भोपाल

सन्दर्भ - NCF 2005 – भारतीय भाषाओं का शिक्षण। बच्चे की भाषा और अध्यापक – कृष्ण कुमार

 

 

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