अपने विद्यालय में समावेश को प्रोत्‍साहन देना

पिछले दो या तीन दशकों में, दुनिया भर की सरकारों ने – भारत सहित – शिक्षा के सभी क्षेत्रों में लिंग सम्‍बन्धित और सामाजिक पक्षपातों को सम्‍बोधित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की घोषणा की है। इस अवधि में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में और उसे शिक्षकों द्वारा कैसे प्रदान किया जा सकता है उसमें आमूल–चूल परिवर्तन हुए हैं। बदलते रुझानों को निम्न प्रकार से संक्षेप में सारांशित किया जा सकता है:

• असमताओं को दूर करने पर अधिक जोर

• सभी के लिए न्यायोचित शिक्षा

• बच्चे पर केन्द्रित, जरूरत पर आधारित शिक्षा

• सीखने की प्रक्रिया में हर बच्चे की प्रतिभागिता को अधिकाधिक करना।

ये रुझान प्रमुख भारतीय नीति दस्तावेजों में प्रतिबिम्‍बत हैं, जिनमें शिक्षा पर राष्ट्रीय नीति (एनपीई, 1986), द नेशनल करिकुलम फॉर एलीमेंटरी एण्‍ड सेकण्‍डरी एजुकेशन (1988), और द रिवाइज्ड एनपीई एण्‍ड प्रोग्राम फॉर एक्शन (1992) इत्यादि शामिल हैं।

 2005 के राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ) ने एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया है, जिसमें सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण समावेशी शिक्षा प्रदान करने के तरीके शामिल किए गए हैं। वह शिक्षकों द्वारा निम्नलिखित कामों को करने की जरूरत को स्पष्ट करती है:

• हर बच्चे की अनोखी जरूरतों के प्रति संवेदनशील होना

• बच्चे पर केन्द्रित, सामाजिक रूप से प्रासंगिक और न्यायोचित पढ़ाने/सीखने की प्रक्रिया प्रदान करना

• उनके सामाजिक और सांस्कृतिक सन्दर्भों में विविधता को समझना।

आज कोई भी शिक्षक विद्यार्थियों द्वारा अपने साथ विद्यालयों में लाई जा रही असंख्य माँगों और अपेक्षाओं की समझ या उनके प्रति संवेदी हुए बिना व्यावसायिक रूप से सफल नहीं हो सकता है। उन्हें, वर्ग, जाति, धर्म, लिंग और निःशक्तता पर ध्यान दिए बिना सभी विद्यार्थियों को संलग्न करने और सीखने के सार्थक अवसर प्रदान करने में सक्षम होना चाहिए। शिक्षा का अधिकार कानून 2009 (RtE) लिंग और सामाजिक श्रेणी पर ध्यान दिए बिना सभी विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के इस निर्णय को अधिक मजबूत और सुदृढ़ करता है, जिसके लिए उसमें शारीरिक और सीखने के पर्यावरणों, पाठ्यचर्या, और अध्यापन प्रथाओं से सम्‍बन्धित विस्तृत स्वीकार योग्य नियम निर्धारित किए गए हैं।

उल्लेखनीय परिमाण में शोध द्वारा पुष्टि की गई है कि शिक्षकों के कौशल, रवैये और प्रोत्साहन सुविधाहीन और अधिकारहीन समुदायों के बच्चों की संलिप्तता, प्रतिभागिता और उपलब्धि उल्लेखनीय ढंग से बढ़ा सकते हैं। समावेशी विद्यालय कक्षा में शिक्षकों द्वारा न्यायोचित शिक्षा प्रदान करने में विद्यालय नेता की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण होती है। सबसे पहले, यह आवश्यक है कि विद्यालय नेता:

• को विश्वास हो कि नतीजे न्यायोचित हो सकते हैं, उनके विद्यार्थियों के व्यक्तिगत प्रारंभिक बिंदु चाहे कुछ भी हों

• स्टाफ और विद्यार्थियों को सभी विद्यार्थियों की उपलब्धि को ऊपर उठाने के लिए प्रोत्साहित करता है

• विद्यार्थियों की सफलता को उनकी शैक्षणिक उपलब्धि से अधिक आधार पर मापता है।

एक विद्यालय नेता के रूप में, आपको बच्चे के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्रसंघ के चार्टर (1989) से अवगत होना चाहिए जो हर एक सदस्य देश को अपने सभी बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का आदेश देकर विविधता को अपनाने की उल्लेखनीय प्रेरणा देता है। विद्यालय नेता के रूप में अपने विद्यालय के समुदाय में समावेशी रवैयों और बर्तावों का नेतृत्व करना, उन्हें प्रोत्साहित करना और विकसित करना आपकी जिम्मेदारी है।


TESS-भारत का उद्देश्य है विद्यार्थी-केंद्रित, सहभागी दृष्टिकोण के विकास में विद्यालय नेताओं और शिक्षकों की सहायता के लिए मुक्त शिक्षा संसाधनों (OERs) के प्रावधानों के माध्यम से भारत में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों की कक्षा परिपाटियों में सुधार लाना। 105 TESS-भारत विषय OERs शिक्षकों को भाषा, विज्ञान और गणित के विषयों में विद्यालय की पाठ्यपुस्तक के लिए एक लघु पुस्तिका प्रदान करते हैं। वे शिक्षकों के लिए अपनी कक्षाओं में अपने छात्रों के साथ प्रयोग करने के लिए गतिविधियाँ प्रदान करते हैं, जिनमें यह दर्शाने वाले वृत्त-अध्ययन भी शामिल रहते हैं कि अन्य शिक्षकों द्वारा उस विषय को कैसे पढ़ाया गया, और उनमें शिक्षकों के लिए अपनी पाठ योजनाएँ तैयार करने के लिए तथा विषय संबंधी ज्ञान के विकास में सहायक संसाधन भी जुड़े रहते हैं।

TESS-भारत OERs को भारतीय पाठ्यक्रम और संदर्भों के अनुकूल भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय लेखकों के सहयोग से तैयार किया गया है और ये ऑनलाइन तथा प्रिंट उपयोग के लिए उपलब्ध हैं (http://www.tess-india.edu.in/)OER भाग लेने वाले प्रत्येक भारतीय राज्य के लिए उपयुक्त, कई संस्करणों में उपलब्ध हैं और उपयोगकर्ताओं को इन्हें अपनाने तथा अपनी स्थानीय जरूरतों एवं संदर्भों की पूर्ति के लिए उनका अनुकूलन करने के लिए और स्थानीयकरण करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

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