ऑंकड़ों के प्रबन्‍धन का शिक्षण : 2

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बुनियादी जानकारी

प्राथमिक स्‍कूल में गणित के अन्‍तर्गत पढ़ाए जाने वाले सभी प्रसंग (topic) बच्‍चों की अपनी दुनिया को समझने की जरूरत से उत्‍पन्‍न होते हैं। इस समझ को बनाने व बढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान बच्‍चों का सामना विविध प्रकार के संख्‍यात्‍मक आँकड़ों (डेटा) से होता है। समान तरह के अन्‍य संख्‍यात्‍मक आँकड़ों के सम्‍बन्‍ध में देखने पर अक्‍सर इन आँकड़ों का महत्‍वपूर्ण अर्थ होता है। जब आँकड़ों को एक अर्थपूर्ण तरीके से व्‍यवस्थित किया जाता है और ग्राफ के रूप में प्रस्‍तुत किया जाता है तो समानताएँ व विभिन्‍नताएँ स्‍पष्‍ट रूप से समझ आती हैं। आँकड़ों की तुलना की जा सकती है और पैटर्न का अवलोकन कर उपयोगी निष्‍कर्षों पर पहुँचा जा सकता है। 

आज के समय में आँकड़ों की भरमार है और इनमें से अधिकांश आँकड़े ग्राफ के रूप में प्रस्‍तुत किए जाते हैं। ग्राफ संचार का एक तरीका बन गया है। आँकड़ों को ग्राफ के रूप में प्रस्‍तुत करने का कौशल, ग्राफ को सही ढंग से पढ़ना व उसकी व्‍याख्‍या करना और उसकी सीमाओं को जानना अब बहुत महत्‍वपूर्ण हो गया है।

इस विषय को पढ़ाते समय यह सुनिश्चित करना महत्‍वपूर्ण है कि आँकड़ों को ग्राफ के रूप में प्रस्‍तुत करने को अपने आप में अन्‍त नहीं समझा जाए। आदर्श रूप में एक ग्राफ को महत्‍वपूर्ण अवलोकनों में परिणित होना चाहिए। एक बार जब ग्राफ बन जाए तो जिस अहम सवाल को कक्षा में उठाना चाहिए व उस पर चर्चा की जानी चाहिए वह है कि ‘यह ग्राफ क्‍या कहता है?’ इसका एक खुला हुआ पहलू भी है। साथ ही इस्‍तेमाल किए जाने वाले आँकड़े वास्‍तविक व अर्थपूर्ण होने चाहिए और उपयोगी ग्राफ कार्य करने के लिए अवसर प्रदान करने वाले होने चाहिए।   

इस शृंखला के पहले भाग के लिए आँकड़ों के प्रबन्‍धन का शिक्षण : 1 लिंक पर जाएँ  

अवधि : 
(दिन )
परिचय: 

स्‍तर 2   : 5 से 6 वर्ष की उम्र के बच्‍चों के लिए

अपेक्षा : बच्‍चे पिक्‍टोग्राफ बनाने में सक्षम हो होंगे।

बच्‍चे अपने सवाल का जवाब ढूँढ़ने के लिए आँकड़े एकत्र करना, उन्‍हें प्रस्‍तुत करना व आँकड़ों की व्‍याख्‍या करना सीखना शुरू करेंगे। वे शिक्षक द्वारा बनाई गई चित्रलिपि (pictograph) को पढ़ने और उसकी व्‍याख्‍या करने में भी सक्षम होंगे। वे आसान से वेन आरेख का इस्‍तेमाल कर पाने में भी सक्षम होंगे।

ग्राफ बनाने के लिए शिक्षक ऐसे सवालों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं जो क्‍लासरूम में स्‍वाभाविक रूप से उठते हैं। अक्‍सर बच्‍चे खाने की चीजों के बारे में अपनी पसन्‍द-नापसन्‍द व्‍यक्‍त करते हैं। यह  पसन्‍द-नापसन्‍द सब्जियों, फलों, बिस्किट्स या चॉकलेट्स के बारे में हो सकती है। उनके अपने पसन्‍दीदा खेल भी होते हैं। ‘मैं यह जानने के लिए उत्‍सुक हूँ कि हमारी क्‍लास के बच्‍चों का पसन्‍दीदा फल कौन-सा है!’ खूब सारी बातें करने के लिए यह एक शुरुआती बिन्‍दु हो सकता है जिसे शिक्षक कुशलतापूर्वक एक पिक्‍टोग्राफ बनाने के लिए इस्‍तेमाल कर सकते हैं।


गतिविधि 4


 

अब बच्‍चे वास्‍तविक चीजों का चित्रों के रूप में प्रतिचित्रण (mapping) कर पिक्‍टोग्राफ बना सकते हैं। अब तक वे इस स्थिति में पहुँच गए होते हैं कि दिए गए आँकड़ों के लिए भी पिक्‍टोग्राफ बना सकते हैं। चित्र को सरलता से बनाने के लिए वर्गाकार जालीवाले कागज इस्‍तेमाल किए जा सकते हैं। यह एकसमान स्‍केलिंग की जरूरत को पूरा करते हैं। ऊर्ध्‍वाधर कॉलम बच्‍चों द्वारा आसानी से भरे जा सकते हैं। चौकोर जाली बच्‍चों के लिए एक फ्रेम की तरह काम करती है जिससे बच्‍चों को भरने में आसानी होती है। ले‍बलिंग आधार पर की जा सकती है। चूँकि प्रत्‍येक इकाई वर्ग एक ही प्रविष्टि (entry) के लिए है इसलिए इससे गिनने में आसानी होती है। 

इन वर्गों में बनाए गए चित्रों का वास्‍तविक होना जरूरी नहीं है। आमतौर पर यह प्रतीकात्‍मक चित्र होते हैं। अब बच्‍चे मात्राओं की तुलना ज्‍यादा, कम, उससे कम, उससे ज्‍यादा, एक साथ आदि करके इन ग्राफ की व्‍याख्‍या कर सकते हैं।


गतिविधि 5


 

पालतू जानवर या पसन्‍दीदा जानवर बच्‍चों के लिए एक आकर्षक विषय होता है। ‘सबसे ज्‍यादा लोकप्रिय पालतू जानवर कौन-सा है?’ जैसे सवाल प्रारम्भिक बिन्‍दु हो सकते हैं।

एक बार जब ग्राफ बन जाए तो बच्‍चों को अपने अवलोकन बताने के लिए प्रेरित किया जा सकता है:                                        

  • कौन-सा पालतू जानवर सबसे कम लो‍कप्रिय है?                                        
  • कौन-से जानवर हमारी क्‍लास में समान रूप से लोकप्रिय हैं?
  • यदि .................... और बच्‍चे ‘बि‍ल्‍ली’ को चुनते तो वह उतनी ही लोकप्रिय होती जितना कि ‘कुत्‍ता‘ है।                                            
  • ...................... और .................... दोनों मिलकर ...... से ज्‍यादा लोकप्रिय हैं।

शिक्षक अन्‍य पहलुओं पर भी ध्‍यान आकर्षित कर सकते हैं। यदि हम ग्राफ में दी सभी संख्‍याओं को जोड़ दें तो क्‍या उनका कुल योग हमारी क्‍लास के कुल विद्यार्थियों की संख्‍या से मेल खाता है? क्‍यों? या क्‍यों नहीं?

ग्राफ को ऊर्ध्‍वाधर व क्षैतिज दोनों रूपों में दर्शाना जरूरी है। बच्‍चों को दोनों ही रूपों में आँकड़ों को पढ़ने में सक्षम होना चाहिए।


गतिविधि 6 :  क्षैतिज ग्राफ


 

स्‍कूल तक पहुँचने के साधन बच्‍चों के जीवन से करीब से जुड़े होते हैं। यह विषय यातायात, सुरक्षा, भीड़भाड़ आदि के बारे में चर्चा के अवसर प्रदान करता है।

शिक्षक बच्‍चों को चित्र में दर्शाए अनुसार एक चार्ट बनाकर भरने के लिए दे सकते हैं। एक बार जब चार्ट तैयार हो जाए तो शिक्षक पहले बच्‍चों को अपने अवलोकन बताने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। संख्‍यात्‍मक आँकड़े पढ़े जा सकते हैं और उनका रिकार्ड भी रखा जा सकता है। तुलनात्‍मक कथन भी कहे जा सकते हैं।

कुछ सम्‍भावित प्रश्‍न जो चर्चा को आगे बढ़ा सकते हैं इस प्रकार के हो सकते हैं : अधिकांश विद्यार्थी बस के बजाए ऑटो से स्‍कूल क्‍यों आते हैं? कुछ बच्‍चे पैदल कैसे आ पाते हैं? हमारी क्‍लास में ऐसे विद्यार्थी क्‍यों नहीं है जो रेल से स्‍कूल आते हों? क्‍या कुछ ऐसे विद्यार्थी भी हैं जो गाड़ी से भी आते हों और कभी-कभी पैदल भी आते हों? वो ऐसा क्‍यों करते हैं?


गतिविधि 7


 

मौसम कैलेण्‍डर और चार्ट : मौसम को ‘गरम’, ‘हवादार’, ‘बारिश’ व ‘बादल’ में वर्गीकृत किया जा सकता है। बच्‍चे मौसम की इन चार श्रेणियों को दर्शाने वाले प्रतीक बना सकते हैं। प्रत्‍येक दिन वे उस दिन के मौसम के अनुसार कैलेण्‍डर में एक प्रविष्टि भर दें। फिर महीने के आखिर में कैलेण्‍डर की जानकारी के आधार पर एक पिक्‍टोग्राफ बनाया जा सकता है।

इस महीने में इतने बारिश के दिन क्‍यों हैं? क्‍या यह अनुमान लगा पाना सम्‍भव है कि कल किस तरह का मौसम होगा? यदि हम मार्च के लिए एक मौसम चार्ट बनाएँ तो क्‍या वह भी ऐसा ही होगा? उसमें क्‍या अलग होगा? क्‍या कुछ ऐसे दिन भी हैं जिनमें बारिश और तेज हवाएँ दोनों हों?  इन दिनों को हम कैसे दिखाएँगे?


गतिविधि 8


 

स्टिकर्स बच्‍चों को बहुत पसन्‍द होते हैं। बतौर होमवर्क आप बच्‍चों को स्टिकर्स का इस्‍तेमाल कर एक ग्राफ बनाने को कह सकते हैं। वो अपने ग्राफ को क्‍लास में ला सकते हैं और उस पर बातचीत कर सकते हैं।

"हमारी क्‍लास का सबसे पसन्‍दीदा कार्टून प्रोग्राम कौन-सा है?" यह सवाल भी बच्‍चों के लिए बहुत दिलचस्प होगा।


गतिविधि 9 : दो गोलों वाले वेन आरेख 


 

अपेक्षा : बच्‍चे वास्‍तविक चीजों के ग्राफ बनाएँ।

शिक्षक फर्श पर दो अलग-अलग गोले बना सकते हैं और उन्‍हें ‘चार भुजाओं वाली आकृतियाँ’ व ‘समान भुजाओं वाली आकृतियाँ नाम दे सकते हैं। बच्‍चों से कहें कि एक बार में तरह-तरह की कई आकृतियाँ उठाएँ और देखें कि कौन-सी आकृति किस गोले में आएगी। हालाँकि जब वे एक वर्ग या समचुतुर्भुज उठाएँ तो उन्‍हें यह अस्‍पष्‍ट हो सकता है कि उसे कहाँ रखें। शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच हुई बातचीत के जरिए विद्यार्थी यह देखेंगे कि वर्ग दोनों समूहों से सम्‍बन्‍ध रखता है। अब शिक्षक फिर से दो गोले बना सकते हैं जो एक-दूसरे को काटते हों और बच्‍चों से आकृतियों को सही जगह पर रखने को कह सकते हैं। एक ही आकृति का दो अलग-अलग गुणों के रूप में वर्णन करना सीखने के लिए बच्‍चों को मदद की जरूरत होगी। इस स्‍तर पर उन्‍हें सभी आकृतियों का नाम बताना जरूरी नहीं है।

उनसे पूछें : यह आकृति दोनों समूहों का हिस्‍सा क्‍यों है? यह आकृतियाँ किसी और समूह का हिस्‍सा क्‍यों नही हैं? किस स्थिति में कोई भी आकृति केवल एक ही गोले का हिस्‍सा होगी?


पद्मप्रिया शिराली ऋषिवैली स्‍कूल, आन्‍ध्रप्रदेश के कम्‍युनिटी मैथमैटिक्‍स सेन्‍टर में 1983 से काम कर रही हैं। वे गणित,कम्‍प्‍यूटर, भूगोल,अर्थशास्‍त्र, पर्यावरण विज्ञान तथा तेलगु भाषा का अध्‍यापन करती रहीं हैं। आजकल वे आउटरीच कार्यक्रम के तहत एस.सी.ई.आर.टी., आन्‍ध्रप्रदेश के साथ उनके पाठ्यक्रम सुधार तथा प्राथमिक स्‍तर की गणित पाठ्यपुस्‍तकों के निमार्ण में संलग्‍न हैं। 1990 के दशक में उन्‍होंने जाने माने गणितज्ञ श्री पी.के. श्रीनिवासन के साथ काम किया है। वे ऋषिवैली स्‍कूल की मल्‍टीग्रेड लर्निंग प्रोग्राम टीम का हिस्‍सा भी रही हैं, जिसे ‘स्‍कूल इन ए बाक्‍स’ के नाम से जाना जाता है। उनसे padmapriya.shirali@gmail.com पर सम्‍पर्क किया जा सकता है।

यह अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय तथा कम्‍युनिटी मैथमैटिक्‍स सेन्‍टर,ऋषिवैली की संयुक्‍त पत्रिका At Right Angles (a resource for school mathematics) Volume 5 ,N0.3 Nov 2016 में प्रकाशित Teaching Deta Handling  के हिन्‍दी अनुवाद का दूसरा भाग है। अनुवाद : कविता तिवारी   सम्‍पादन: राजेश उत्‍साही

पहले भाग के लिए आँकड़ों के प्रबन्‍धन का शिक्षण : 1 लिंक पर जाएँ  

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