आँकड़ों के प्रबन्‍धन का शिक्षण : 1

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बुनियादी जानकारी

प्राथमिक स्‍कूल में गणित के अन्‍तर्गत पढ़ाए जाने वाले सभी प्रसंग (topic) बच्‍चों की अपनी दुनिया को समझने की जरूरत से उत्‍पन्‍न होते हैं। इस समझ को बनाने व बढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान बच्‍चों का सामना विविध प्रकार के संख्‍यात्‍मक आँकड़ों (डेटा) से होता है। समान तरह के अन्‍य संख्‍यात्‍मक आँकड़ों के सम्‍बन्‍ध में देखने पर अक्‍सर इन आँकड़ों का महत्‍वपूर्ण अर्थ होता है। जब आँकड़ों को एक अर्थपूर्ण तरीके से व्‍यवस्थित किया जाता है और ग्राफ के रूप में प्रस्‍तुत किया जाता है तो समानताएँ व विभिन्‍नताएँ स्‍पष्‍ट रूप से समझ आती हैं। आँकड़ों की तुलना की जा सकती है और पैटर्न का अवलोकन कर उपयोगी निष्‍कर्षों पर पहुँचा जा सकता है। 

आज के समय में आँकड़ों की भरमार है और इनमें से अधिकांश आँकड़े ग्राफ के रूप में प्रस्‍तुत किए जाते हैं। ग्राफ संचार का एक तरीका बन गया है। आँकड़ों को ग्राफ के रूप में प्रस्‍तुत करने का कौशल, ग्राफ को सही ढंग से पढ़ना व उसकी व्‍याख्‍या करना और उसकी सीमाओं को जानना अब बहुत महत्‍वपूर्ण हो गया है।

इस विषय को पढ़ाते समय यह सुनिश्चित करना महत्‍वपूर्ण है कि आँकड़ों को ग्राफ के रूप में प्रस्‍तुत करने को अपने आप में अन्‍त नहीं समझा जाए। आदर्श रूप में एक ग्राफ को महत्‍वपूर्ण अवलोकनों में परिणित होना चाहिए। एक बार जब ग्राफ बन जाए तो जिस अहम सवाल को कक्षा में उठाना चाहिए व उस पर चर्चा की जानी चाहिए वह है कि ‘यह ग्राफ क्‍या कहता है?’ इसका एक खुला हुआ पहलू भी है। साथ ही इस्‍तेमाल किए जाने वाले आँकड़े वास्‍तविक व अर्थपूर्ण होने चाहिए और उपयोगी ग्राफ कार्य करने के लिए अवसर प्रदान करने वाले होने चाहिए।   

प्राथमिक स्‍तर पर आँकड़ों के प्रबन्‍धन (data handling) में क्‍या शामिल होता है?

इसमें सवाल करना (अच्‍छा होगा कि सवाल स्‍वाभाविक रूप से आएँ), आँकड़े एकत्र करना या फिर दिए गए आँकड़ों के समूह पर कार्य करना, ग्राफ के रूप में प्रस्‍तुत करना (ग्राफ में भौतिक वस्‍तुओं को दर्शाने वाले ग्राफ से लेकर, पिक्‍टोग्राफ, बार ग्राफ और वेन आरेख सभी शामिल हैं) और ग्राफ की व्‍याख्‍या करना शामिल है। इस स्‍तर पर व्‍याख्‍या ग्राफ से तथ्‍यों को पढ़ने, तुलनात्‍मक कथन कहने, पैटर्न पहचानने और कारणों व आँकड़ों के निहितार्थ को समझने के रूप में होगी। 

आँकड़ों को एकत्र करने, उनका प्रबन्‍धन करने, उन्‍हें प्रस्‍तुत करने व उनकी व्‍याख्‍या करने और आगे चलकर अनुमान लगाने व विश्‍लेषण करने में बढ़ती जटिलता के विभिन्‍न स्‍तरों के माध्‍यम से आँकड़ों के प्रबन्‍धन और ग्राफ के रूप में उन्‍हें प्रस्‍तुत करने के कौशल में बढ़ोत्‍तरी होती है। वह परिस्थितियाँ ही होती हैं जहाँ बच्‍चे अपने संख्‍यात्‍मक कौशल प्रयोग करते हैं।

ग्राफ बनाने के कौशलों का क्रम या श्रेणी क्‍या होनी चाहिए?

छोटे बच्‍चों को पढ़ाते समय गणित के सभी क्षेत्रों में अवधारणा का परिचय पहले ठोस वस्‍तुओं और फिर अर्द्ध ठोस वस्‍तुओं जैसे कि चित्र के माध्‍यम से करवाना चाहिए और फिर अमूर्त की ओर बढ़ना चाहिए। इसी तरह आँकड़ों का प्रबन्‍धन पढ़ाते समय भी विकासात्‍मक क्रम भौतिक वस्‍तुओं के ग्राफ से शुरू करके, पिक्‍टोग्राफ, बार ग्राफ और अन्‍त में अमूर्त ग्राफ के रूप में होना चाहिए।

आँकड़ों का सर्वेक्षण या पूछताछ किस स्‍थान पर करनी चाहिए?

सर्वेक्षण की योजना स्‍वाभाविक रूप से ऐसे सवालों से उभरनी चाहिए जो बच्‍चे पूछते हों। उदाहरण के लिए क्‍लास का सबसे पसन्‍दीदा खेल कौन-सा है? हमारी क्‍लास के ज्‍यादातर बच्‍चों का जन्‍मदिन किस महीने में होता है?

एक बार जब सवाल तैयार हो जाए तो बच्‍चे समझ सकते हैं कि उस सवाल का जवाब ढूँढ़ने के लिए उन्‍हें किस तरह के आँकड़े एकत्र करने की जरूरत है। किसी सवाल का जवाब देने के लिए जरूरी आँकड़ों को पहचानना आँकड़ों के प्रबन्‍धन को सीखने के उद्देश्‍यों में से एक है। अब बच्‍चे आँकड़े एकत्र करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। आँकड़े एकत्र करने का काम कई रूपों में हो सकता है। यह इतना आसान भी हो सकता है जैसे सहपाठियों से अपना हाथ खड़ा करने को कहना या फिर भरने के लिए एक प्रश्‍नावली (questionnaire) बनाना। आँकड़ों का रिकार्ड भी चित्र बनाने से लेकर टैलीमार्क्‍स और सारांश व रिकॉर्डिंग आदि कई रूपों में रखा जा सकता है। 

अगली चुनौती आँकड़ों को पठनीय रूप में व्‍यवस्थित करना और विभिन्‍न माध्‍यमों के जरिए उन्‍हें प्रस्‍तुत करना है।‍

आँकड़ों की व्‍याख्‍या तीन स्‍तरों पर की जा सकती है। पहली, ग्राफ के संख्‍यात्‍मक मूल्‍यों को पढ़ना और ‘कौन-सा मूल्‍य सबसे बड़ा/सबसे छोटा है’ जैसे सवालों का जवाब देना। दूसरा, सम्‍बन्‍धों को पढ़ना यानी कि तुलनात्‍मक कथन कहना : जैसे कितना कम है, कितने गुना अधिक है आदि। और तीसरा, पैटर्न पर ध्‍यान देना व उनके बीच के सम्‍बन्‍धों को देखना, कारणों व आँकड़ों के निहितार्थ को समझना।

तो एक सर्वेक्षण करने के समूचे कार्य के अन्‍तर्गत अनेक उद्देश्‍य शामिल होते हैं: जरूरी आँकड़ों को पहचानना, आँकड़ों को एकत्र करने के लिए प्रारूप तय करना, आँकड़ों के रिकॉर्ड रखने का एक बेहतर तरीका ढूँढ़ना, आँकड़ों को प्रस्‍तुत करने के लिए उपयुक्‍त प्रारूप चुनना, बुनियादी सवालों का जवाब देना और साथ ही साथ आँकड़ों में मौजूद अन्‍य पैटर्न पर ध्‍यान देना व आँकड़ों की व्‍याख्‍या करना।

हालाँकि सर्वेक्षण करना एक बहुत अधिक समय लेने वाली प्रक्रिया होती है और कभी-कभी यह जरूरी हो जाता है कि बच्‍चों के समक्ष संरचित पूर्व निर्धारित आँकड़ों के समूह प्रस्‍तुत किए जाएँ। यह बच्‍चों के जीवन और वर्तमान अनुभवों से जुड़े हुए होने चाहिए और साथ ही बच्‍चों के लिए अर्थपूर्ण भी होने चाहिए। 

अवधि : 
(दिन )
परिचय: 

स्‍तर 1  :  3 से 5 साल की उम्र के बच्‍चों के लिए

अपेक्षा: बच्‍चे वास्‍तविक चीजों के ग्राफ बनाएँ। 

ग्राफ से बच्‍चों का परिचय शिक्षक आमतौर पर ऐसी खेल गतिविधियों के माध्‍यम से करवाएँ जो बच्‍चों के लिए मजेदार हों। इस स्‍तर पर शिक्षक वास्‍तविक चीजों के ग्राफ बनाने में बच्‍चों की मदद कर सकते हैं। फिर बच्‍चे गिनती कर सकते हैं और संख्‍या शब्‍दों का इस्‍तेमाल करके वास्‍तविक वस्‍तुओं की मात्राओं की तुलना कर सकते हैं। चूँकि ग्राफ वास्‍तविक चीजों के बनाए गए हैं जिन्‍हें फर्श पर रखा जा सकता है या बुलेटिन बोर्ड पर चि‍पकाया जा सकता है तो फर्श या बोर्ड का आधार X-अक्ष की तरह कार्य करेगा। लेबलिंग और पैमाने की एकरूपता स्थितियों से स्‍वाभाविक रूप से उत्‍पन्‍न होती है। स्‍पष्‍ट है कि इस स्‍तर पर बच्‍चों के सामने अक्ष, आधार और पैमाने जैसे पारिभाषिक शब्‍दों का इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए।


गतिविधि 1

सामग्री: यूनीफिक्‍स क्‍यूब्‍स या लकड़ी के अलग-अलग रंग के बड़े ब्‍लॉक्‍स


 

रेलगाड़ी बनाना बच्‍चों को हमेशा अच्‍छा लगता है। यूनीफिक्‍स (ऐसे क्‍यूब्‍स जो आपस में एकदम फिट हो जाते हैं) क्‍यूब्‍स से रंगीन क्‍यूब्‍स की एक रेलगाड़ी बनाने के लिए बच्‍चे बहुत उत्‍साहित होंगे। क्‍यूब की रेलगाड़ी वा‍स्‍तविक चीजों का एक ग्राफ बन जाती है। एक बार जब ग्राफ बन जाए तो बच्‍चे ग्राफ के बारे में बातचीत कर सकते हैं। लाल गाड़ी में क्‍यूब्स की संख्‍या भूरी गाड़ी में क्‍यूबस की संख्‍या से ज्‍यादा है। यदि हरी गाड़ी में लगाने के लिए हमारे पास एक क्‍यूब और हो तो क्‍यूब्‍स की संख्‍या लाल गाड़ी में क्‍यूब्‍स की संख्‍या के बराबर हो जाएगी। तब शिक्षक ग्राफ व अलग-अलग सम्‍भावनाओं के बारे में अन्‍य सवाल उठा सकते हैं। जैसे, क्‍या होगा यदि लाल रेलगाड़ी के तीन क्‍यूब्‍स स्‍टेशन पर पीछे छूट जाएँ? कौन-सी रेलगाड़ी सबसे छोटी होगी? यदि हम भूरी रेलगाड़ी में चार क्‍यूब्‍स और जोड़ दें तो क्‍या होगा?

 यदि क्‍यूब्‍स उपलब्‍ध न हों तो बच्‍चे लकड़ी के ब्‍लॉक्‍स के टॉवर बना सकते हैं और इनकी तुलना कर सकते हैं। लेकिन ब्‍लॉक्‍स एक समान माप के होने चाहिए।


गतिविधि 2

सामग्री: अलग-अलग रंगों की आकृतियाँ


 

बच्‍चों के हर समूह को लगभग 20 आकृतियाँ (अलग-अलग आकृतियाँ अलग-अलग रंगों में) दें। बच्‍चों से कहें कि आकृतियों का अलग-अलग समूहों में (जैसे कि आकृति के अनुसार) वर्गीकरण करें और उनसे ग्राफ बनाएँ।  

उनसे सवाल पूछें : यह आकृतियाँ एक समूह में क्‍यों हैं? किस समूह में सबसे ज्‍यादा आकृतियाँ हैं? किसमें सबसे कम हैं? अभी और कितनी आकृतियाँ हैं? क्‍या इन आकृतियों को किसी और आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है?

बच्‍चे आकृतियों के इसी समूह का रंग के आधार पर भी वर्गीकरण कर सकते हैं। वे इन्‍हें किनारों की संख्‍या या कोनों की संख्‍या के आधार पर भी वर्गीकृत कर सकते हैं। वे इन आकृतियों को समान लम्‍बाई के किनारों, अलग-अलग लम्‍बाई के किनारों और जिसमें कोई सीधा किनारा न हो के आधार पर भी वर्गीकृत कर सकते हैं।

त्रिविमीय आकृतियों को भी अलग-अलग तरीकों से (फलकों की संख्‍या, फलकों की आकृति, किनारों की संख्‍या के आधार पर) वर्गीकृत किया जा सकता है। 

 


गतिविधि 3

सामग्री: शतरंज की गोटियाँ  


एक समय की बात है एक राजा था और एक रानी थी... यह कहानी शतरंज की गोटियों से ग्राफ बनाने की गतिविधि से शुरु की जा सकती है।

बच्‍चे गोटियों का वर्गीकरण कर सकते हैं व उनकी पंक्ति बना सकते हैं। शिक्षक शतरंज की विभिन्‍न गोटियों के नामों से बच्‍चों का परिचय कराने के लिए उन्‍हें कॉलम में वर्गीकृत कर सकते हैं।


पद्मप्रिया शिराली ऋषिवैली स्‍कूल, आन्‍ध्रप्रदेश के कम्‍युनिटी मैथमैटिक्‍स सेन्‍टर में 1983 से काम कर रही हैं। वे गणित,कम्‍प्‍यूटर, भूगोल,अर्थशास्‍त्र, पर्यावरण विज्ञान तथा तेलगु भाषा का अध्‍यापन करती रहीं हैं। आजकल वे आउटरीच कार्यक्रम के तहत एस.सी.ई.आर.टी., आन्‍ध्रप्रदेश के साथ उनके पाठ्यक्रम सुधार तथा प्राथमिक स्‍तर की गणित पाठ्यपुस्‍तकों के निमार्ण में संलग्‍न हैं। 1990 के दशक में उन्‍होंने जाने माने गणितज्ञ श्री पी.के. श्रीनिवासन के साथ काम किया है। वे ऋषिवैली स्‍कूल की मल्‍टीग्रेड लर्निंग प्रोग्राम टीम का हिस्‍सा भी रही हैं, जिसे ‘स्‍कूल इन ए बाक्‍स’ के नाम से जाना जाता है। उनसे padmapriya.shirali@gmail.com पर सम्‍पर्क किया जा सकता है।

यह अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय तथा कम्‍युनिटी मैथमैटिक्‍स सेन्‍टर,ऋषिवैली की संयुक्‍त पत्रिका At Right Angles (a resource for school mathematics) Volume 5 ,N0.3 Nov 2016 में प्रकाशित Teaching Deta  Handling  के हिन्‍दी अनुवाद का पहला भाग है। अनुवाद : कविता तिवारी   सम्‍पादन: राजेश उत्‍साही

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